सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के चर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर शुक्रवार को गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पिछले करीब दो महीनों से ट्रायल में किसी भी गवाह की गवाही नहीं हो सकी है, जबकि मामला बेहद संवेदनशील और गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस पर जवाब मांगा और ट्रायल कोर्ट को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में लगातार देरी न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के पीठासीन न्यायाधीश को निर्देश दिया कि गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए कानून के तहत जरूरी कदम उठाए जाएं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई समयबद्ध तरीके से पूरी करने का प्रयास किया जाए और ट्रायल की प्रगति पर नई स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाए।
यह मामला 3 अक्तूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में हुई हिंसा से जुड़ा है। उस दिन किसान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों पर एक एसयूवी वाहन चढ़ा दिया गया, जिसमें चार किसानों की मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद इलाके में हिंसा भड़क गई थी। गुस्साए किसानों द्वारा वाहन चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हुई थी। इस तरह पूरे घटनाक्रम में कुल आठ लोगों की जान गई थी।