लाहौर के प्रमुख अस्पताल मरीजों से भरे
'एआरवाई न्यूज' के मुताबिक, लाहौर के अस्पताल सूखी खांसी, सांस लेने में दिक्कतें, निमोनिया और छाती के संक्रमण से पीड़ित मरीजों से भरे पड़े हैं। प्रमुख अस्पतालों में मरीजों की संख्या काफी अधिक है। जैसे मेयो अस्पताल में चार हजार से अधिक, जिन्ना अस्पताल में 3500, गंगाराम अस्पताल में तीन हजार और बच्चों के अस्पताल में दो हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं।
जहरीली धुंध से फैलीं वायरल बीमारियां
पाकिस्तान के डॉक्टर अशरफ जिया ने कहा, बच्चों और अस्थमा और दिल की बीमारी से पहले पीड़ित मरीजों के लिए यह धुंध ज्यादा खतरनाक हो सकती है। खासतौर पर बच्चों पर इसरका बहुत गंभीर असर पड़ रहा है। जहरीली धुंध के कारण विभिन्न वायरल बीमारियों में इजाफा है, जैसे कि निमोनिया और त्वचा संबंधी रोग। लाहौर में इस समय दस से अधिक वायरल बीमारियां फैल चुकी हैं।
सरकार ने शादी-विवाह पर लगाए प्रतिबंध
सरकार जहरीली धुंध के इस संकट से निपटने के लिए कई कदम उठा रही है। इनमें शादी-विवाह पर तीन महीने का प्रतिबंध, परिवहन विभाग की ओर से नए दिशानिर्देश जारी करना और पंजाब प्रांत में स्कूल और कॉलेजों को बंद करना शामिल है। नासा ने भी इस जहरीली धुंध की तस्वीर को साझा किया है, जिसमें उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर एक मोटी धुंध की परत दिखाई दे रही है।
पाकिस्तान के ऊपर धुंध की परत
- फोटो : एएनआई/नासा
नासा ने साझा की तस्वीर, लाहौर धुंध का केंद्र
नासा के मीडियम रिजॉल्यूशन इमेजिंग स्पेक्ट्रोडियोमीटर (एमओडीआईएस) के मुताबिक, इस धुंध ने पाकिस्तान के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और पंजाब क्षेत्र में 10 नवंबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 1,900 तक पहुंच गया। 11 नवंबर 2024 को पंजाब प्रांत में एक्यूआई 604 था। यह धुंध इतनी घनी है कि पाकिस्तान के अधिक हिस्से हिस्से ढके हुए हैं। दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर के रूप में जाने जाने वाले लाहौर इस धुंध के केंद्र में है।
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