लाहौर हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए हाफिज सईद को परेशान ना करने का आदेश दिया है। आतंक के इस आका का लाहौर हाईकोर्ट ने पक्ष लेते हुए कहा कि हाफिज को उसके सामाजिक कल्याण का काम करने दिया जाए। बता दें कि हाईकोर्ट की तरफ से ये बयान तब आया है जब अमेरिका ने उसके राजनीतिक पार्टी 'मिल्ली मुस्लिम लीग' पर आतंक परोसने का इल्जाम लगाया है।
इसी अदालत ने 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सईद को गिरफ्तारी से मुक्त कर दिया था। सईद के उत्पीड़न को रोकने का यह आदेश उन सबूतों को नजरअंदाज करना है जिसके बिनाह पर सईद को कई आतंकी गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है। मुंबई में नवंबर 2008 में हुए आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आतंकी के तौर पर सूची में शामिल किया गया है।
इंटरपोल को भी कई आतंकवादी वारदातों में शामिल होने की वजह से हाफिज की तलाश है। लश्कर के मीडिया प्रभारी और हाफिज के करीबियों अब्दुल सलाम और जफर इकबाल को भी आतंकी सूची में शामिल किया गया है।
आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाली एजेंसी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को पहले ही ग्रे लिस्ट में डालने का फैसला कर लिया है। पाकिस्तान पर यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक बाद आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि वह पाकिस्तान द्वारा आतंकियों पर लगाम कसने के लिए उठाए जा रहे कदमों से संतुष्ट नहीं है।
व्हाइट हाउस का यह भी कहना है कि पहली बार अमेरिका पाकिस्तान को उसके कामों के लिए जवाबदेह बना रहा है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस साल के शुरू में पाकिस्तान को दी जाने वाली 1625 करोड़ रुपये की सैन्य सहायता पर रोक लगाने की घोषणा की थी।
अमेरिका लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक आतंकी सरगना हाफिज सईद पर पाकिस्तान के कार्रवाई नहीं करने से खफा है। भारत और अमेरिका सईद को मुंबई हमले का मास्टरमाइंड मानते हैं। लिहाजा सईद को वैश्विक आतंकी घोषित किया गया है और उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम भी रखा गया है।