पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के बीच दोनों देशों के बीच रविवार को 18वें दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख के अनसुलझे मुद्दों का जल्द से जल्द एक परस्पर स्वीकार्य समाधान निकालने पर सहमति जताई। पूर्वी लद्दाख सेक्टर के चुशुल-मोल्दो में हुई बैठक को लेकर विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी किया है।
सोमवार को जारी इस बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ प्रासंगिक मुद्दों के समाधान पर दोनों पक्षों ने स्पष्ट और गहन चर्चा की। इस दौरान, दोनों पक्षों ने निकट संपर्क में रहने, सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से बातचीत बनाए रखने और जल्द से जल्द शेष मुद्दों के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान निकालने की दिशा में काम करने पर सहमत हुए।
इस दौरान भारतीय पक्ष ने पूर्वी लद्दाख में डेमचोक और देपसांग के शेष विवादित बिंदुओं पर मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने पर जोर दिया। गौरतलब है कि कोर कमांडर स्तर की वार्ता का 18वां दौर 27 और 28 अप्रैल को होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक से पहले हुआ है। इसमें भाग लेने के लिए चीनी रक्षा मंत्री ली शांगफू भी भारत यात्रा पर आएंगे।
चीन के विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
LAC पर विवाद को शांत करने की दिशा में रविवार को हुई बैठक को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीजिंग में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने संबंधित मुद्दों के समाधान में तेजी लाने पर विचारों का गहन आदान-प्रदान किया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के निर्देशानुसार दोनों पक्षों ने प्रासंगिक मुद्दों के समाधान में तेजी लाने पर चर्चा की।
इससे पहले, दो मार्च को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में जी20 समूह के एक सम्मेलन के मौके पर अपने चीनी समकक्ष किन गैंग के साथ बातचीत की थी। चीन के साथ संबंधों को लेकर भारत का रुख हमेशा से सीमा पर शांति का रहा है। भारत का कहना है कि जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति नहीं होगी तब तक चीन के साथ उसके संबंध सामान्य नहीं हो सकते।
पिछली बैठक दिसंबर 2022 में हुई थी
भारत की तरफ से फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राशिम बाली और चीन की तरफ से उनके समकक्ष अफसर ने पूर्वी लद्दाख सेक्टर पर बैठक की। बैठक चार महीनों के अंतराल के बाद हुई। दोनों के बीच पिछली बैठक दिसंबर 2022 में हुई थी।16वें दौर की सैन्य वार्ता में लिए गए निर्णय के अनुरूप दोनों पक्षों ने पिछले साल सितंबर में गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स इलाके में पेट्रोलिंग पॉइंट 15 से डिसइंगेजमेंट किया था।
चीन की आक्रामकता के बाद बिगड़े थे हालात
2020 में कोरोना के दौरान चीन की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति को बदलने के लिए भारी हथियारों और बड़ी संख्या में सैनिकों को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश के बाद पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच मामलों को सुलझाने के लिए कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता शुरू हुई थी।