16वें दौर की भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की बैठक 17 जुलाई को भारत की तरफ चुशुल-मोल्दो सीमा मिलन स्थल पर हुई। दोनों पक्षों ने पश्चिमी क्षेत्र में LAC के मुद्दों के समाधान के लिए रचनात्मक और दूरदर्शी तरीके से चर्चा जारी रखी।
पूर्वी लद्दाख विवाद पर सैन्य वार्ता पर भारत-चीन संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच खुले रूप से एवं गहराई से विचारों का आदान-प्रदान हुआ। दोनों पक्षों ने फिर से पुष्टि की कि शेष मुद्दों के समाधान से पश्चिमी क्षेत्र में LAC के साथ शांति बहाल करने में मदद मिलेगी और द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति को सक्षम बनाया जा सकेगा। दोनों पक्ष पश्चिमी क्षेत्र में जमीन पर सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने पर सहमत हुए।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्ष संपर्क में रहने और सैन्य एवं राजनयिक माध्यमों की मदद से बातचीत बनाए रखने और शेष मुद्दों को पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर जल्द से जल्द काम करने पर सहमत हुए। इससे पहले भारत और चीन के बीच 16वें दौर की सैन्य वार्ता रविवार को करीब साढ़े बारह घंटे तक चली। इस दौरान भारत ने फिर से चीन पर दबाव डाला कि वह पूर्वी लद्दाख के विवाद वाले क्षेत्रों से सेना पूरी तरह पीछे हटाए।
दोनों देशों के बीच करीब चार महीने के अंतराल के बाद वार्ता का दौर फिर शुरू हुआ है। वार्ता में भारतीय पक्ष ने सीमा पर अप्रैल 2020 में सैन्य झड़प आरंभ होने से पहले की स्थिति बहाल करने की मांग की। चुशूल मोल्दो प्वाइंट के भारतीय इलाके में रविवार सुबह 9:30 बजे वार्ता आरंभ हुई। ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि इस वार्ता से हॉट स्प्रिंग क्षेत्र के पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 पर सैन्य तैनाती घटाने की दिशा में प्रगति हो सकती है।
वार्ता में भारतीय पक्ष का नेतृत्व लेह स्थित 14वें कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने किया जबकि चीनी दल का नेतृत्व दक्षिण शिंजियांग सैन्य जिले के प्रमुख मेजर जनरल यांग लिन ने किया। दोनों देशों के बीच 15वें दौर की सैन्य वार्ता 11 मार्च को हुई थी और इसमें विवाद सुलझाने को लेकर कोई सफलता नहीं हासिल हुई थी।
शी जिनपिंग ने शिनजियांग का दौरा किया
इससे एक दिन पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शिनजियांग का दौरा किया और अपने सैनिकों के साथ मुलाकात की। यह अहम माना जा रहा है क्योंकि पीपुल्स लिबरेशन एमी (पीएलए) की शिनजियांग सैन्य कमान मई 2020 से दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिरोध के बीच लद्दाख क्षेत्र में भारत-चीन सीमा की देखरेख कर रही है। शिनजियांग में चीनी सैनिकों के साथ उनकी बैठक भारत और चीन के बीच रविवार को होने वाली 16वें दौर की सैन्य वार्ता से पहले हुई है।
पिछले हफ्ते विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच बाली में हुई बातचीत में पूर्वी लद्दाख से जुड़े विवाद का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन से इतर बाली में एक घंटे की बैठक में जयशंकर ने यी को पूर्वी लद्दाख में सभी लंबित मुद्दों के शीघ्र समाधान की जरूरत बताई थी।
उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हितों पर आधारित होने चाहिए। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि टकराव वाले कुछ स्थानों से सैनिकों को पीछे हटाए जाने का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए शेष सभी क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए तेजी लाने की आवश्यकता को दोहराया।
5 मई 2020 को हिंसक झड़प हुई थी
सैन्य और कूटनीतिक वार्ता की एक श्रृंखला के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे और गोगरा क्षेत्र में अलगाव की प्रक्रिया पूरी की थी। पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद 5 मई 2020 को भारत और चीन की सेनाओं के बीच पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद से दोनों देशों ने भारी भरकम हथियारों के साथ ही 50,000 से 60,000 सैनिकों की तैनाती की हुई है।