गलवां की झड़प के बाद लेह-लद्दाख से लेकर चमोली और किन्नौर से सटी चीन की सीमाओं पर चौकसी अधिकतम स्तर पर है। हेलिकॉप्टर से निगरानी की जा रही है तो लड़ाकू विमानों की परवाज के बीच तोपें तैनात की जा रही हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना के लिए रसद के साथ-साथ असलहे पहुंच रहे हैं।
पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य जमावड़ा लगातार बढ़ रहा है। अब लद्दाख के आसमान में तेज आवाज के साथ लड़ाकू विमान रोज उड़ान भर रहे हैं। युद्ध जैसे अंदेशे के बीच तैयारियां जारी हैं।
गलवां घाटी के अलावा पैंगोंग झील की फिंगर 4 पर भी तनाव है। इसी से सटी मन पैंगोंग पंचायत की मुखिया देछिन महिला सरपंच हैं। इसी तरह से चुशुल की सरपंच सेरिंग डोलकर भी महिला सरपंच हैं। चुशुल के कार्यकारी पार्षद कोनचोक स्टैंजिन ने बताया कि तनाव के दौरान सरपंच अपने गांवों के लोगों का हौसला बढ़ाते हैं। इनमें महिला सरपंच भी शामिल हैं।
चमोली से लगे सीमावर्ती क्षेत्र में भारी संख्या में जवानों की तैनाती कर दी गई है। सेना के वाहनों में खाद्यान्न सामग्री (रसद) भी सीमा क्षेत्र में पहुंचाई जा रही है। आईटीबीपी उत्तरी कमान के उच्चाधिकारी तीन दिन से सीमा क्षेत्र में डटे हैं। बाड़ाहोती का दौरा भी किया। सेना और आईटीबीपी के साथ ही खुफिया तंत्र अलर्ट है। लगातार सीमा क्षेत्र की घेराबंदी की जा रही है। शुक्रवार को चमोली जिले में आसमान में सेना के हेलीकॉप्टर भी काफी दिखे। सेना की ओर से पर्याप्त मात्रा में असलहे और तोपें भी सीमा क्षेत्र में पहुंचाई जा रही हैं।
चीन के जवानों ने एलएसी के उस पार चीन की सीमा में तीन-चार टेंट लगा रखा है। भारतीय सेना भी एलएसी पर पूरी तरह से मुस्तैद है। भारत-तिब्बत सीमा के साथ सटे हिंदुस्तान के आखिरी गांव छितकुल में आईटीबीपी ने सुरक्षा के और पुख्ता प्रबंध किए हैं। यहां जवानों की संख्या बढ़ा दी गई है।
छितकुल गांव के लोगों ने खुद ही आवाजाही पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा लिया है। गांव के लोगों ने करीब एक किलोमीटर दूर बैरियर लगाकर ग्रामीणों की तैनाती भी कर दी है। बैरियर पर तैनात लोगों को वाहनों की तलाशी लेने के निर्देश दिए गए हैं और बाहरी क्षेत्रों से आने वाले अनजान लोगों को गांव में आने पर मनाही की गई है।