Lt. Gen. (R) Dr. Subrata Saha
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अरुणाचल प्रदेश सीमा पर लगातार हालात बदल रहे हैं। चीन ने ऐसी हरकत पहली बार नहीं की है। हमारी सेना हर हालात से निपटना जानती है। लेकिन जिस तरह की घटना इस बार तवांग घाटी में हुई, इससे पहले कभी नहीं हुई थी। बात धक्का-मुक्की से आगे बढ़ चुकी है। अगर चीन को माकूल जवाब देना है, तो पूर्वोत्तर की सीमाओं पर विकास की गति को तेज करना होगा। अमर उजाला से खास बातचीत में यह बात लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) और रक्षा विशेषज्ञ डॉ. सुब्रत साहा ने कही।
साहा ने कहा, अरुणाचल प्रदेश में आज भी बहुत सी जगह ऐसी हैं, जहां आज तक सड़क नहीं पहुंची हैं। जहां यह घटना घटी, वास्तव में हम वहां पर बिल्कुल मैकमोहन लाइन पर बैठे हैं। आज भी हमें वहां पहुंचने के लिए तीन से साढ़े तीन घंटे की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। एक सवाल के जवाब में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य साहा ने कहा, यह समझने की जरूरत है कि पूर्वी लद्दाख के मुकाबले यहां के हालात और यहां की स्थिति में काफी अंतर है। सरकार जितनी जल्दी यहां पर सड़कों का जाल बिछाएगी, हमारे लिए उतना बेहतर होगा।
सरकार को प्राथमिकता के आधार पर सीमावर्ती गांवों के विकास की ओर ध्यान देना चाहिए। उनको यह विश्वास होना चाहिए कि किसी भी स्थिति में उनको अपना गांव छोड़ने की जरूरत नहीं है। हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में काम काफी हुआ है लेकिन अभी इस पर तेजी से काम करने की जरूरत है।