रिजर्व बैंक ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर नकारात्मक रहेगी। इस पर राजीव कुमार ने कहा कि नकारात्मक वृद्धि का अभी पूरी तरह अनुमान नहीं लगाया जा सकता। अभी घरेलू और वैश्विक मोर्चे पर बहुत सी चीजें ‘अज्ञात’ हैं।
कुमार ने कहा कि सरकार के 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का मकसद सिर्फ उपभोक्ता मांग नहीं, बल्कि कुल मांग में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने प्रणाली में नकदी बढ़ाने के कई उपाय किए हैं। वित्त मंत्री भी बैंकों को ऋण का प्रवाह बढ़ाने को प्रोत्साहित कर रही हैं। इससे अर्थव्यवस्था की कुल मांग बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अब महत्वपूर्ण यह है कि वित्तीय क्षेत्र विशेष रूप से बैंक जोखिम उठाने से बचें नहीं और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) सहित अन्य क्षेत्रों को ऋण का प्रवाह बढ़ाएं। यदि ऐसा होता है तो मांग पैदा होगी और हम देश में आर्थिक गतिविधियों में सुधार देखेंगे।
यह पूछे जाने पर कि क्या रिजर्व बैंक को घाटे का मौद्रिकरण करना चाहिए, कुमार ने कहा कि कि सरकार प्रोत्साहन पैकेज के वित्तपोषण को सभी संभावित विकल्पों पर विचार कर रही है। इस संभावना कि चीन से बाहर निकलने वाली कंपनियां भारत का रुख कर सकती हैं, कुमार ने कहा कि यदि हम कंपनियों को लक्ष्य करने के लिए सही नीतियां लाते हैं, तो मुझे कोई वजह नजर नहीं आती कि ये कंपनियां भारत नहीं आएं।