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सर्वे: नहीं बढ़ीं नौकरियां, मोदी से बेहतर था मनमोहन का समय

Fri, 27 May 2016 09:21 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला,नई दिल्ली
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- फोटो : p
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2 साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी भाषण देते थे तो वो यह कहते नहीं थकते थे कि जब वो आएंगे तो युवाओं को रोजगार मिलेगा और उनके अच्छे दिन आएंगे। इतना ही नहीं बीते दिनों अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए साक्षात्कार में भी उन्होंने कहा था कि उनका लक्ष्य है कि देश के युवाओं को रोजगार मिले। लेकिन हकीकत पीएम मोदी के दावों और वादों से उलट है। श्रम कार्यालय द्वारा किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि इस तिमाही नौकरी मिलने के अवसर बीते सालों से सबसे कम हुए हैं। सर्वे के आंकड़ो पर गौर करें तो यह बात भी सामने आती है कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का कार्यकाल नौकरियों के मामले में पीएम मोदी से अच्छा था।
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बता दें कि कि देश में नौकरी पाने के अवसर कितने कम हुए और कितने बढ़े इस संबंध में पहला सर्वे 2009 में किया गया था। मौजूदा सर्वे जो कि आठ सेक्टर्स में किया गया है जिसमें लेदर, मेटल, ऑटोमोबाइल , जूलरी, ट्रांसपोर्ट, आईटी बीपीओ, कपड़ा और हैंडलूम पावरलूम शामिल थे। उनकी 1932 यूनिट्स  के सर्वे में यह बात सामने आई है कि 2013 में 4.19  लाख नौकरियां निकली थी और 2014 में यह आंकड़ा 4.21 लाख पहुंचा लेकिन 2015 में यह 1.35 लाख तक ही सीमित रह गया।



सर्वे में यह बात सामने आई है कि इस तिमाही आईटी और बीपीओ फायदे में है। इनके हालात बाकी सेक्टर्स के बनिस्बत सही है। बीते साल इस सेक्टर में नौकरी मिलने  के अवसर अच्छे थे। इंडिया रेटिंग के अर्थशास्त्री डी के पंत के अनुसार 'भूमि अधिग्रहण के विवाद के साथ साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग में कमी के चलते किसी भी निवेशक के लिए पैसा लगाना कठिन है।' सर्वे के मुताबिक 2015 में सबसे ज्यादा निवेश सर्विस सेक्टर में हुआ और अप्रैल 2015 से 2016 के बीच इस क्षेत्र में 55.05 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई। वहीं ट्रेडिंग सेक्टर में यह ग्रोथ 40.95 प्रतिशत तक ही सीमित रही।
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सबसे ज्यादा खराब हालात ऑटोमोबाइल सेक्टर के हैं जहां ग्रोथ माइनस में पहुंचकर -7.3 प्रतिशत है। नौकरियों के घटते अवसर सरकार के लिए चिंता का विषय है क्योंकि हर माह करीब  10 लाख युवा नौकरियों की तलाश में बाजार में आते हैं। इस सर्वे को करने के लिए फील्ड वर्क जनवरी से फरवरी 2016 के बीच संपन्न किया गया। 
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