अटल जी की विदाई ने अगर लाल किले के प्रधानमंत्री के भाषण को नेपथ्य में कर दिया तो केरल की बाढ़ भी अपने साथ कई बड़ी खबरों को बहा ले गई।
मुंबई में आतंकवादी साजिश रचने के आरोप में हथियारों और विस्फोटक के जखीरे सहित कथित हिंदुत्ववादी संस्था के कुछ सदस्य गिरफ्तार, रुपए की गिरावट और डॉलर 70 के पार, संसद से महज एक किलोमीटर की दूरी पर जेएनयू के चर्चित छात्र उमर खालिद पर गोली चलाकर हमलावर फरार और फिर गिरफ्तार, भाजपा अध्यक्ष का एक राष्ट्र एक चुनाव के लिए विधि आयोग के अध्यक्ष से पत्र व्यवहार जैसी खबरें सुर्खियां तो बनी लेकिन सार्वजनिक विमर्श से दूर रहीं।
और अब विदेश में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बयान को लेकर कांग्रेस भाजपा में छिड़ी तकरार के जरिए दोनों दलों ने आने वाले विधानसभा और उसके बाद लोकसभा चुनावों के लिए अपने अपने राजनीतिक एजेंडे तय करने शुरु कर दिए हैं।
भाजपा राहुल गांधी को अपरिक्व और अनाड़ी साबित करने में जुट गई है तो कांग्रेस जर्मनी और लंदन में दिए गए राहुल के भाषणों के औचित्य साबित करके बेरोजगारी को राजनीति का केंद्रीय मुद्दा बनाना चाहती है और भीड़ हिंसा और बढ़ते आतंकवाद के लिए केंद्र की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराना चाहती है।
यूपीए सरकार के जमाने में जब समझौता एक्सप्रेस, अजमेर शरीफ दरगाह और मालेगांव बम धमाकों के आरोप में हिंदुत्ववादी संगठन से जुड़े स्वामी असीमानंद, प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित आदि को मुंबई एटीएस ने गिरफ्तार किया था, उसके बाद तत्कालीन गृह सचिव आरके सिंह (जो अब केंद्र की भाजपा सरकार में मंत्री हैं) और गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने देश में हिंदू आतंकवाद पनपने का खतरा बताते हुए आरएसएस और भाजपा को भी कठघरे में खडा करने का सियासी दांव चला था।
भाजपा ने यूपीए सरकार के इस दांव को उलटा करके इस तरह घुमाया कि कांग्रेस को हिंदू विरोधी साबित करने में उसे सियासी कामयाबी मिली और जिसका नतीजा कांग्रेस को 2014 के लोकसभा चुनावों में भुगतना पड़ा।
केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद से ही अदालत में सबूतों के अभाव में एक एक करके सारे अभियुक्त बरी हो गए और यूपीए के जमाने का हिंदू आतंकवाद का हौआ हवा हो गया। लेकिन भाजपा और संघ परिवार ने इसे लेकर कांग्रेस और अन्य गैर भाजपा दलों को घेरना जारी रखा। लेकिन तर्कशास्त्री कलबुर्गी, पंसारे और दाभोलकर के बाद बेंगलूर में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या में पुलिस जांच में जिस कथित हिंदुत्ववादी संस्था से जुड़े लोगों के नाम सामने आए, उसी संस्था के तीन सदस्यों को मुंबई एटीएस द्वारा आतंकवादी साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद एक बार फिर हिंदुत्ववादी आतंकवाद का मुद्दा गरम हो गया है।
यह गिरफ्तारी तब हुई है जब मुंबई और केंद्र में भाजपा की सरकार है। इसलिए इनके पीछे गैर भाजपा राजनीतिक साजिश का आरोप भी नहीं लग सकता है। हालांकि सनातन संस्था और आरोपितों के वकील के द्वारा इन तीनों को गौरक्षक बताते हुए एटीएस पर उन्हें झूठा फंसाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
लेकिन जिस भारी मात्रा में पुलिस ने इनके कब्जे से हथियार और विस्फोटक बरामद किए हैं, उससे शक की सुई गहरा जाती है। हालांकि कांग्रेस इस मुद्दे पर फिलहाल खामोश है लेकिन उसे इस बात का सुकून जरूर है कि अब उसके कथित हिंदू आतंकवाद की बात की पुष्टि खुद भाजपा शासित महाराष्ट्र की पुलिस कर रही है। वैसे भाजपा भी इस मुद्दे पर फिलहाल खामोश ही रही।
उधर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कीमत बढ़कर 70 रुपए के पार हो जाने के बाद कांग्रेस बेहद आक्रामक मुद्रा में आ गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2013 में डॉलर की कीमत 68 रुपए हो जाने पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री मोदी के उस भाषण की वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जिसमें मोदी ने रुपए की कीमत गिरने को तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार की आर्थिक नीतियों की असफलता बताते हुए जमकर हमला किया था और कहा था कि रुपए और कांग्रेस में होड़ लगी है कि कौन कितना नीचे गिर सकता है।
मोदी ने यह भी कहा था कि डॉलर की कीमत प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) की उम्र से होड़ कर रही है। अब कांग्रेस उसी भाषा और शैली में मोदी और भाजपा पर हमलावर है।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला कह रहे हैं कि मोदी जी डॉलर को भी मार्गदर्शक मंडल में भेज रहे हैं, क्योंकि अब वह भी 75 तक पहुंचने वाला है। रुपए की इस गिरावट को अंतर्राष्ट्रीय बाजार और अन्य कुछ देशों की मुद्राओं में आई गिरावट से जोड़ते हुए भाजपा नेता और सरकार के प्रवक्ता अपनी सरकार का बचाव कर रहे हैं।
इसके साथ ही पिछले कुछ दिनों से लगातार जिस तरह सार्वजनिक जीवन की तमाम नामचीन हस्तियों की दुनिया से विदाई हुई है, उससे लगता है कि जैसे अचानक लंबी उम्र वाले लोगों को किसी की नजर लग गई है।
कवि गोपालदास नीरज, द्रमुक नेता एम. करुणानिधि, उद्योगपति राजन नंदा, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता आर.के. धवन, लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, क्रिकेटर अजित वाडेकर, कांग्रेस नेता गुरुदास कामत और दिग्गज पत्रकार कुलदीप नैय्यर और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान जैसी शख्सियतों के इतने कम अंतराल में चले जाने से जो शून्य पैदा हुआ है उसकी भरपाई में वक्त लगेगा। इन सब दिग्गजों को विनम्र श्रद्धांजलि।