कर्नाटक के हासन जिले में कथित रिश्वतखोरी को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने जिला प्रशासन के अधिकारियों और जिला प्रभारी मंत्री शिवलिंगे गौड़ा पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी फाइलें मंजूर कराने के लिए अधिकारियों की ओर से लाखों रुपये मांगे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि डिप्टी कमिश्नर (डीसी) केएस लताकुमारी ने अपने पद पर बने रहने के लिए 70 लाख रुपये दिए थे। हालांकि, डीसी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और कथित व्हाट्सएप चैट की जांच शुरू करा दी है।
15 पन्नों की व्हाट्सएप चैट दिखाकर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
कुमारस्वामी ने रविवार को कथित तौर पर डीसी के निजी सहायक और एक अन्य व्यक्ति के बीच हुई व्हाट्सएप बातचीत के 15 पन्ने जारी किए। उनका दावा है कि इन बातचीत से जिले के प्रशासन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा होता है। उन्होंने एक कथित चैट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें फाइलें मंजूर कराने के बदले डीसी तक पैसे पहुंचाने और विभाग के दूसरे कर्मचारियों में रकम बांटने की बात कही गई है।
कुमारस्वामी के मुताबिक, यह बातचीत तीन स्टोन क्रशर की फाइलों और सकलेशपुर में जमीन के इस्तेमाल से जुड़ी अनुमति के एक मामले को लेकर हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रभारी मंत्री बनने के बाद शिवलिंगे गौड़ा डीसी का तबादला कराना चाहते थे, लेकिन लताकुमारी ने एक तहसीलदार के जरिए कथित तौर पर 70 लाख रुपये देकर अपनी कुर्सी बचा ली।
भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरा
केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि सरकार के साप्ताहिक प्रजा सेवा कार्यक्रम में मिलने वाली शिकायतों और आवेदनों पर क्या कार्रवाई होती है? कुमारस्वामी ने कहा कि हर शनिवार इस कार्यक्रम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि उनका मकसद सरकार को बदनाम करना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की ऐसी गतिविधियों पर रोक लगवाना है। अगर सरकार वास्तव में इस समस्या को खत्म करना चाहती है तो वह सबसे पहले उसका स्वागत करेंगे। कुमारस्वामी ने पूरे मामले की व्यापक जांच कराने की मांग की।
डीसी ने आरोपों को बताया झूठा, एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी
दूसरी ओर, डिप्टी कमिश्नर केएस लताकुमारी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने वायरल वीडियो देखा है और कथित व्हाट्सएप बातचीत की प्रिंट कॉपी भी देखी है। अब यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कराई जा रही है कि बातचीत असली है या उसके साथ कोई छेड़छाड़ की गई है।
लताकुमारी ने बताया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से भी बात की है और जांच साइबर अपराध पुलिस को सौंपने की तैयारी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि व्हाट्सएप चैट किस मोबाइल फोन से की गई, इसे किसने तैयार किया और इसमें कोई बदलाव किया गया है या नहीं।
डीसी ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से उन्हें काफी दुख पहुंचा है। पद पर बने रहने के लिए गलत तरीके अपनाने का आरोप पूरी तरह झूठा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कुमारस्वामी के पास ऐसी कोई चैट थी तो उसे सीधे पुलिस को सौंपकर एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव को भी इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी।
हसनंबा मंदिर उत्सव के बीच आरोपों के समय पर उठाए सवाल
लताकुमारी ने आरोपों के समय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस समय प्रशासन हसनंबा मंदिर उत्सव की तैयारियों में व्यस्त है, जहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे समय में जिला प्रशासन और उसके अधिकारियों पर इस तरह के व्यक्तिगत आरोप लगाना बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को मुख्य सचिव के सामने उठाएंगी और लिखित शिकायत भी देंगी। डीसी के मुताबिक, मीडिया की ओर से लगातार फोन आने के कारण उन्हें अपनी बात रखनी पड़ रही है।
शिवकुमार बोले- डीसी अच्छा काम कर रही हैं
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिला प्रभारी मंत्री शिवलिंगे गौड़ा इन आरोपों से काफी आहत हैं। शिवकुमार ने कहा कि विपक्ष को अपना दोस्त समझना चाहिए, क्योंकि उसकी मौजूदगी में सरकार को बेहतर प्रशासन देने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने डीसी लताकुमारी का बचाव करते हुए कहा कि वह अच्छा काम कर रही हैं। विपक्षी नेता उनसे अपनी हर बात के मुताबिक काम नहीं करा पा रहे हैं, इसलिए उनके खिलाफ शिकायतें कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह खुद प्रशासन पर नजर रख रहे हैं और किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। वहीं, इस पूरे मामले पर जिला प्रभारी मंत्री शिवलिंगे गौड़ा की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।