कांग्रेस और सीपीआईएम समत कई राजनीतिक दलों ने इस घटना की आलोचना की है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि 21वीं सदी के इस दौर में भी अगर ऐसे जातिवादी मानसिकता वाले लोग हैं, तो यह केरल की सामाजिक जागरूकता की परंपरा के लिए शर्मनाक है।
केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (केएसएचआरसी) ने कूडलमाणिक्यम मंदिर में कथित जातिगत भेदभाव के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। मामले में आयोग की सदस्य वी. गीता ने कोचीन देवस्वम कमिश्नर और कूडलमाणिक्यम मंदिर के कार्यकारी अधिकारी को दो हफ्ते के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
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क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक पिछड़ी जाति के व्यक्ति को देवस्वम भर्ती बोर्ड की परीक्षा पास करने के बाद मंदिर में कझकम पद पर नियुक्त किया गया था। लेकिन मंदिर के तंत्री (मुख्य पुजारी) के विरोध के कारण उसे दूसरे कार्य में लगा दिया गया। बता दें कि, मंदिर में फूलों की माला बनाना और अन्य पूजा से जुड़ी सजावट व रस्मों को पूरा करने का काम कझकम के अंतर्गत आता है।
मंदिर में विवाद क्यों हुआ?
मंदिर के तंत्रियों ने कथित तौर पर पिछड़ी जाति से आने वाले व्यक्ति की नियुक्ति का विरोध किया और मंदिर की पूजा-पाठ में भाग लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, मंदिर प्रशासन ने साफ कहा कि तंत्री मंदिर प्रशासन के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते और भर्ती बोर्ड द्वारा की गई नियुक्ति को बदला नहीं जा सकता। अगर तंत्री इस फैसले से असहमत हैं, तो वे कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।
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जातिवाद का आरोप खारिज
तंत्री समाजम और वारियर समाजम के नेताओं ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को गलत बताया है। अखिल केरल तंत्री समाजम के महासचिव जयनारायणन नंबूदिरीपाद ने कहा कि यह मुद्दा जातिवाद से जुड़ा नहीं है, बल्कि मंदिर की परंपराओं और पहले से कझकम का काम कर रहे लोगों की नौकरी बचाने से जुड़ा है।
राजनीतिक दलों का विरोध
कांग्रेस और सीपीआईएम समत कई राजनीतिक दलों ने इस घटना की आलोचना की है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि 21वीं सदी के इस दौर में भी अगर ऐसे जातिवादी मानसिकता वाले लोग हैं, तो यह केरल की सामाजिक जागरूकता की परंपरा के लिए शर्मनाक है। सीपीआईएम नेता और पूर्व देवस्वम मंत्री के. राधाकृष्णन ने इसे जातिगत भेदभाव करार देते हुए कहा कि यह मनुस्मृति की विचारधारा को फिर से लागू करने की कोशिश है। योगम के नेता वेल्लप्पल्ली नटेशन ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि सरकार को उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो यह मानते हैं कि मंदिरों पर केवल तंत्रियों का अधिकार है।