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तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा को झटका: मुख्य सचिव के खिलाफ 'भ्रामक पोस्ट' करने पर कोर्ट सख्त; विवाद क्यों?

Thu, 15 Oct 2026 08:19 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, कोलकाता।

सार

कोलकाता की अलिपुर कोर्ट ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के खिलाफ अपमानजनक बयानबाजी करने से रोक दिया है। मुख्य सचिव की शिकायत पर कोर्ट ने महुआ को 24 घंटे के भीतर विवादित पोस्ट्स हटाने और 5 जनवरी 2027 तक ऐसे बयानों से बचने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्ष आलोचना पर कोई रोक नहीं लगाई है।
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महुआ मोइत्रा, टीएमसी, सांसद - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। कोलकाता की अलिपुर कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के खिलाफ कोई भी 'अपमानजनक या झूठा बयान' देने से रोक लगा दी है। मुख्य सचिव ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी कि महुआ मोइत्रा ने वोटर लिस्ट के काम को लेकर उन पर बिना किसी सबूत के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद अदालत ने यह सख्त रुख अपनाया है।
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24 घंटे में हटाने होंगे एक्स पर किए गए पोस्ट
अलिपुर अदालत ने कृष्णनगर से सांसद महुआ मोइत्रा को साफ आदेश दिया है कि वे मुख्य सचिव के खिलाफ किए गए अपने सभी सोशल मीडिया पोस्ट तुरंत हटाएं। आदेश मिलते ही या ई-मेल के जरिए सूचना प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर महुआ को अपने 'एक्स' (ट्विटर) हैंडल से वे पोस्ट डिलीट करने होंगे, जो वोटर लिस्ट के रिवीजन (एसआईआर) और बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़े हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि यह पाबंदी सिर्फ झूठे और अपमानजनक बयानों पर है, सरकारी फैसलों की जायज आलोचना करने पर कोई रोक नहीं है।

पांच जनवरी 2027 तक महुआ मोइत्रा पर पाबंदी
मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह 'एकतरफा अंतरिम आदेश' जारी किया है। इसके तहत महुआ मोइत्रा तीन और छह अक्तूबर को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट की गई बातों को न तो दोबारा शेयर कर सकती हैं और न ही वैसी बातें दोहरा सकती हैं। कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को एक 'कारण बताओ नोटिस' भी भेजा है, जिसमें पूछा गया है कि जब तक इस मामले का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक इस रोक को जारी क्यों न रखा जाए। फिलहाल यह आदेश पांच जनवरी 2027 तक लागू रहेगा, जब कोर्ट इस पर अगली सुनवाई करेगा।
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टीएमसी सांसद का रुख क्या?
अदालत का फैसला आने के बाद सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार को कहा कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट में आदेश को रद्द कराने की अर्जी (वैकेटिंग एप्लिकेशन) दाखिल करेंगी। अदालत ने भी सांसद को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया है। जज ने साफ किया है कि महुआ मोइत्रा अपने पक्ष में सभी जरूरी कागजात और सबूत कोर्ट के सामने रख सकती हैं और इस अंतरिम रोक को हटवाने या इसमें बदलाव कराने के लिए नियमानुसार अर्जी दे सकती हैं।

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वोटर लिस्ट विवाद में आईएएस मनोज अग्रवाल ने क्या कहा?
1990 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज अग्रवाल ने अपने सम्मान की रक्षा के लिए अलिपुर कोर्ट का रुख किया था। भाजपा सरकार आने के बाद मई महीने में मुख्य सचिव बनने से पहले मनोज अग्रवाल राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के पद पर तैनात थे। कोर्ट ने भी माना कि तीन अप्रैल 2025 से 11 मई 2026 तक सीईओ के रूप में अग्रवाल भारत निर्वाचन आयोग की देखरेख और दिशा-निर्देशों में काम कर रहे थे। अग्रवाल ने साफ कहा कि महुआ के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं, क्योंकि कानूनन राज्य के सीईओ के पास अकेले किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची में जोड़ने या हटाने की कोई शक्ति ही नहीं होती।
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मामले से जुड़ी बड़ी बातें
  • यह कानूनी कार्रवाई कोलकाता के अलिपुर स्थित 'सिविल जज सीनियर डिविजन, प्रथम कोर्ट' में हुई है। महुआ मोइत्रा ने अपने 'एक्स' हैंडल पर विवादित पोस्ट्स तीन अक्तूबर और छह अक्तूबर को शेयर किए थे।
  • कोर्ट ने इस पूरे मामले की अगली आधिकारिक सुनवाई के लिए पांच जनवरी 2027 की तारीख तय की है। कोर्ट ने सांसद को आदेश की कॉपी देने के लिए ई-मेल के इस्तेमाल को भी कानूनी रूप से मान्य माना है।
  • मनोज अग्रवाल ने तीन अप्रैल 2025 से लेकर 11 मई 2026 तक बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में सेवा दी थी। आईएएस अधिकारी मनोज अग्रवाल को मई महीने में राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्य सचिव का पद दिया गया था।
  • चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक वोटर लिस्ट में बदलाव का अधिकार व्यक्तिगत रूप से सीईओ के पास नहीं होता है।
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