पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुए एक भयावह हादसे ने दुर्गा पूजा की खुशियों को मातम में बदल दिया। कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई। वहीं, घायल हुए 25 लोगों में से 14 का शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। इनमें से तीन मरीजों को आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जबकि एक की हालत गंभीर है।
इस घटना को लेकर गिरीश पार्क थाने में स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आयोजकों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105, 110 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है। इस मामले में अब तक 14 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है, ताकि घटना के कारणों और जिम्मेदार लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर ये भगदड़ क्यों और कैसे मची? आइए चश्मदीदों की जुबानी जानते हैं कि कब, क्या और कैसे हुआ...
बारिश के चलते बढ़ती गई भीड़
एक चश्मदीद ने हादसे के दौरान बने हालात की जानकारी देते हुए कहा, ''बारिश के कारण पंडाल के अंदर भीड़ बढ़ गई थी। बाहर से लोग भी बारिश से बचने के लिए अंदर आ रहे थे। इस बीच, संकरे प्रवेश द्वार, कम रोशनी और धक्कामुक्की ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। हादसे में लोगों को बाहर निकलने तक का रास्ता नहीं मिल पा रहा था।''
पंडाल में जगह कम भीड़ हुई हद से ज्यादा
चश्मदीद प्रेम गुप्ता ने बताया कि बारिश के कारण पंडाल के अंदर काफी भीड़ जमा हो गई थी। बाहर मौजूद लोग भी बारिश से बचने के लिए अंदर आने लगे। इससे वहां दम घुटने जैसी स्थिति बन गई। अंदर मौजूद लोग बाहर निकलने के लिए जोर लगाने लगे और इसी दौरान भगदड़ मच गई।
पुलिस-प्रशासन पर भी चश्मदीद ने उठाए सवाल
प्रेम गुप्ता ने पुलिस-प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “कल वीआईपी लोगों के आने पर पुलिस-प्रशासन ने बैरिकेड लगाए थे। अगर ये व्यवस्था पहले की गई होती, तो शायद दुर्घटना को रोका जा सकता था।”
संकरे रास्ते और कम रोशनी से बढ़ी परेशानी
एक अन्य चश्मदीद के मुताबिक, पंडाल में प्रवेश करने के लिए लोगों को करीब एक से डेढ़ घंटे तक कतार में खड़ा रहना पड़ा था। प्रवेश द्वार काफी संकरा था। बाहर निकलते समय बारिश शुरू हो गई, जिसके कारण कई लोग पंडाल के अंदर ही रुक गए।
चश्मदीद ने बताया. ''लोगों के रुकने के बाद पीछे से धक्कामुक्की शुरू हो गई। जगह कम होने के साथ ही इलाके में रोशनी भी पर्याप्त नहीं थी। अंधेरे में एक-दो लोग गिर गए। इसके बाद पीछे से लगातार धक्का लगने के कारण कई लोग गिरने लगे।''
उन्होंने बताया, ''इस दौरान मेरी बेटी और पोती भी गिर गईं। मैंने किसी तरह खुद को संभाला और उन्हें वहां से बाहर निकाला।''
17 वर्षीय आकृति की मौत से परिवार सदमे में
भगदड़ में जान गंवाने वाली 17 वर्षीय आकृति के परिवार की एक सदस्य ने बताया कि भारी भीड़ के कारण उनकी बहन की मौत हो गई। परिवार गया से पहली बार दुर्गा पूजा देखने आया था। उनके साथ तीन बहनें, मामा, मामी और परिवार का एक अन्य सदस्य भी था। परिवार के सदस्य ने कहा, ''वहां बहुत ज्यादा भीड़ थी। लोग आगे और पीछे, दोनों तरफ से दब रहे थे। बाहर निकलने के लिए कहीं जगह नहीं थी। न इस तरफ से निकल सकते थे और न ही दूसरी तरफ से।''