महाकुंभ में स्नान करने जाने वाले श्रद्धालुओं से जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक कोलकाता के व्यवसायी अपनी पत्नी और मित्र के साथ संगम स्नान करने जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बिजनेसमैन उत्तम मंडल, उनकी पत्नी और मित्रों का संगम स्नान इसलिए भी खास है, क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने महाकुंभ को मृत्युकुंभ बताया था। ममता के विवादित बयान के बाद काफी सियासी बयानबाजी हुई, लेकिन सभी बातों से बेपरवाह कोलकाता निवासी देवव्रत पत्रिया कहते हैं कि वे धार्मिक झुकाव के कारण नहीं, जिज्ञासा के कारण महाकुंभ में शामिल होने जा रहे हैं। उन्होंने सीएम ममता के बयान से भी असहमति जताई। बता दें कि 13 जनवरी से शुरू हुआ 45 दिवसीय धार्मिक समागम 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के मौके पर समाप्त होगा।
मुख्यमंत्री के बयान से असहमत हैं कोलकाता के व्यवसायी
मौनी अमावस्या के दिन हुए हादसे में 30 लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विगत 18 फरवरी को विधानसभा में कहा था कि भगदड़ जैसी घटनाओं के कारण महाकुंभ "मृत्यु कुंभ" में बदल चुका है। बकौल सीएम ममता बनर्जी, 'अधिकारियों ने वास्तविक मौतों को दबा दिया है।' उन्होंने सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी जाहिर कीं। इस संबंध में सवाल पर देवव्रत कहते हैं कि वे व्यक्तिगत रूप से सीएम से असहमत हैं।
प्रयागराज जाने वाले विमानों में जगह नहीं
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रविवार शाम को कोलकाता हवाई अड्डे से प्रयागराज जाने वाले दो विमानों में लगभग पूरी सीटें भरी हुई थीं। पश्चिम बंगाल की राजधानी आंध्र प्रदेश और अन्य स्थानों से आने वाले यात्री अगली सुबह की प्रतीक्षा कतार में खड़े थे।
पवित्र डुबकी लगाने को लेकर काफी उत्साहित
कोलकाता से शाम 7:30 बजे उड़ान भरने से ठीक पहले एक यात्री मंडल ने बताया, वे पहली बार प्रयागराज कुंभ मेले में जा रहे हैं। उन्होंने कहा, मेरी पत्नी और मेरे दोस्त भी साथ यात्रा कर रहे हैं। सब लोग संगम में पवित्र डुबकी लगाने जा रहे हैं और काफी उत्साहित हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टिप्पणी के बारे में मंडल ने कहा, पश्चिम बंगाल की सीएम को ऐसा कहने से पहले सोचना चाहिए था। पूरे जत्थे के उत्साह और परिवार की खुशी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि समूह में शामिल तीन महिलाएं (मां और दो बेटियां) सेल्फी क्लिक कर रही थीं।
सीएम ममता के बयान पर महिलाओं ने क्या कहा
पहचान न बताने की शर्त पर बेटियों में से एक ने बताया, हम प्रयागराज से पहले हरिद्वार जैसे अन्य स्थानों पर कुंभ मेले में जा चुके हैं, लेकिन प्रयागराज मेले में हम पहली बार जा रहे हैं। मंडल की पत्नी ने भी कहा कि भले ही पश्चिम बंगाल से हर कोई धार्मिक या आध्यात्मिक कारणों से महाकुंभ में नहीं जा रहा हो। लेकिन मुख्यमंत्री 'मृत्युकुंभ' जैसी टिप्पणी से बच सकती थीं। वे "सहमत नहीं" हैं।
महाकुंभ का आयोजन और भीड़ के कारण हादसे
बता दें कि पिछले महीने प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान करने सात करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। अत्यधिक भीड़ के कारण आधी रात के बाद लगभग ढाई बजे भगदड़ की खबर आई। इस हादसे में 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 घायल हुए। इसके बाद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी भगदड़ मची। प्रयागराज जाने वाली ट्रेन को लेकर असमंजस के बीच रात करीब साढ़े नौ बजे हुए हादसे में 18 लोगों की जान चली गई थी।
क्यों खास है महाकुंभ
देश के विभिन्न हिस्सों और दुनिया के अलग-अलग कोने से लोग महाकुंभ में डुबकी लगाने आ रहे हैं। गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों के संगम पर पावन स्नान करने आ रहे लोगों का मानना है कि पवित्र डुबकी लगाने से उनके पाप धुल जाएंगे।
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