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बंगाल में बवाल: ममता बनर्जी की रैली में भिड़े TMC और BJP कार्यकर्ता, बीच सड़क पर लगे 'चोर-चोर' के नारे

Wed, 08 Jul 2026 04:07 PM IST
राकेश कुमार एएनआई,बालीगंज।

सार

क्या पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस रैली में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे, जिसके चलते यह झड़प हुई? क्या कोलकाता में राजनीतिक लड़ाई अब इतनी बढ़ चुकी है कि अदालती आदेश के बावजूद सड़कों पर ऐसे ही तमाशे होते रहेंगे? इस टकराव ने बंगाल की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
 
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ममता बनर्जी की रैली में हंगामा - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी नेत्री ममता बनर्जी की रैली के दौरान जमकर हंगामा और बवाल हुआ। बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ के बीच निकाले जा रहे इस मार्च में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। न्यूज एजेंसी एएनआई के ताजा फुटेज में साफ दिख रहा है कि कैसे दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे से बुरी तरह उलझ पड़े। इस हंगामे के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव है।
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बीच सड़क पर धक्का-मुक्की और नारेबाजी
यह हाई-वोल्टेज ड्रामा उस समय शुरू हुआ जब टीएमसी नेता ममता बनर्जी की अगुवाई में पार्टी का जुलूस बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ की तरफ बढ़ रहा था। इसी दौरान वहां भाजपा के समर्थक भी पहुंच गए और दोनों राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। पहले दोनों तरफ से तीखी बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को धक्का देते हुए 'चोर, चोर' के नारे लगाने शुरू कर दिए।
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इस हंगामे से जुड़ीं पांच बड़ी बातें
  1. पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी नेत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में निकाला जा रहा था मार्च।
  2. यह पूरी झड़प और धक्का-मुक्की कोलकाता के बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ के बीच हुई।
  3. टीएमसी और भाजपा के समर्थक बीच सड़क पर एक-दूसरे से बुरी तरह उलझ पड़े।
  4. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को निशाना बनाते हुए जमकर की नारेबाजी।
  5. कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने कल ही समय और रूट बदलकर इस रैली को मंजूरी दी थी।

जब कोर्ट की इजाजत थी तो सुरक्षा में चूक क्यों हुई?
इस रैली को लेकर कल ही कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने समय सीमा और रूट में कुछ बदलाव करते हुए इसे आयोजित करने की अनुमति दी थी। अदालत के आदेश के बाद सुरक्षा के दावे तो किए गए थे, लेकिन जैसे ही मार्च हाजरा मोड़ की तरफ बढ़ा, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता सड़क पर आ गई। पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को संभाला, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है।
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बारुईपुर में बच्ची के साथ हुई दरिंदगी
यह पूरा बवाल बारुईपुर में 11 साल की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के विरोध में ही शुरू हुआ था। इस खौफनाक वारदात के खिलाफ टीएमसी के छात्र-युवा संगठन ने न्याय की मांग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट की मंजूरी के बाद कोलकाता में यह रैली निकाली थी। चूंकि इस घटना के मुख्य आरोपी प्रभा मंडल का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है, इसलिए राज्य में पहले से ही सियासी पारा चढ़ा हुआ था। बस इसी गुस्से और राजनीति के चलते जब यह मार्च बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ की तरफ बढ़ रहा था, तो टीएमसी और भाजपा के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और शांतिपूर्ण रैली देखते ही देखते अखाड़ा बन गई।

 
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