दिल्ली चिड़ियाघर की वार्षिक रिपोर्ट 1992-93 में छपा चित्र, जापान के राजकुमार एकीशीनो और राजकुमारी कीको कोवाशिमा के साथ चिड़िया घर के अधिकारी
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वन्यजीव प्रेमी पशुओं के लिए कभी-कभी ऐसे काम कर जाते हैं जो इतिहास में हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज हो जाते हैं। ऐसा ही एक वाकया 1992 में तब हुआ था जब जापान की राजकुमारी कीको कोवाशिमा अपने पति राजकुमार एकीशिनो के साथ भारत यात्रा पर आई हुईं थीं। यात्रा के दौरान उनका दिल्ली चिड़ियाघर देखने का कार्यक्रम बन गया। जब वे चिड़ियाघर पहुंचीं तो वहां सफेद बाघिन को देखकर बहुत खुश हुईं।
सफेद बाघिन ने उसी समय दो मादा बच्चों को भी जन्म दिया था। राजकुमारी की यात्रा को यादगार बनाने के लिए उनसे उनके नाम पर बाघिन के बच्चों के नाम रखने की अनुमति मांगी गई। अनुमति मिलते ही बाघिन के दोनों बच्चों के नाम राजकुमारी और उनकी बेटी के नाम पर ‘कीको’ और ‘माको’ रख दिए गये थे।
उस समय दिल्ली चिड़ियाघर के निदेशक रहे बीएम अरोड़ा ने
अमर उजाला को बताया कि यह उनके साथ-साथ चिड़ियाघर के सभी कर्मचारियों के लिए बेहद गौरवशाली क्षण था। राजकुमारी बाघिन को देख बहुत खुश हुईं थीं और हम किसी भी तरह उनकी यात्रा को यादगार बनाना चाहते थे। यह उनके सम्मान के साथ-साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों को बल देने वाली बात भी थी।
कुछ लोगों को इस बात पर संकोच हो रहा था कि जापान का राजपरिवार इसके लिए अनुमति देगा भी या नहीं। अंतत: उनसे इसके बारे में औपचारिक अनुमति लेने का निर्णय हुआ। लेकिन उन सबके लिए यह बेहद ख़ुशी की बात थी कि राज परिवार ने इसे बेहद सकारात्मक ढंग से लिया और बाघिन के बच्चों के नाम राजकुमारी और उनकी बेटी के नाम पर रखने की अनुमति दे दी।