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भारत ने अमेरिकी विरोध के बावजूद रूस से की एस-400 मिसाइल की डील, जानें क्यों है खास

Fri, 01 Jun 2018 04:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत ने वायु सेना के लिए रूस से एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद संबंधी बातचीत पूरी कर ली है। यह सौदा अमेरिका के विरोध के वाबजूद हुआ है। दोनों देशों के बीच हुआ ये सौदा 40 हजार करोड़ रुपये का है। भारत करीब 4,000 किलोमीटर लंबी चीन-भारत सीमा पर अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियां खरीदना चाहता है। जिसमें एस-400 और एस-300 बेहतर संस्करण हैं। 
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एस-400 को 2007 में रूस अपनी सेना में शामिल कर चुका है। चीन पहले ही रूस से एस-400 मिसाइल की आपूर्ति शुरू कर चुका है। तुर्की भी रूस से एस-400 मिसाइल का सौदा कर चुका है। सऊदी अरब, कतर, बेलारूस और मिस्र भी इसे खरीदने के इच्छुक हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कि इस मिसाइल में ऐसा क्या खास है कि दुनिया के कई देश इसे खरीदने की इच्छा रखते हैं- 
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यह एक ऐसी एयर डिफेंस मिसाइल है जो बाहरी मिसाइल हमलों से देश की रक्षा करती है। यह देश पर संभावित मिसाइल हमले की तुरंत जानकारी देता है और जब जरूरत पड़ती है तो यह एंटी मिसाइल दागकर दुश्मन की मिसाइल को मार गिराता है।

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इस एस-400 डिफेंस मिसाइल प्रणाली में लगे रडार 100 से लेकर 300 टार्गेट को ट्रैक कर सकते हैं। साथ ही इसकी मदद से भारत 600 किमी तक की रेंज में ट्रैकिंग कर सकता है। इसके अलावा यह मिसाइल प्रणाली एक ही समय में 400 किमी की रेंज में 36 टार्गेट को निशाना बना सकती है। 
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इस डिफेंस प्रणाली से विमानों, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ साथ जमीनी ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। यह मिसाइलें 400 किमी तक की दूरी तक मार करने की क्षमता रखती हैं। इस सिस्टम से एक साथ तीन मिसाइलें दागी जा सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इससे मिसाइल से लेकर ड्रोन तक से किए जाने वाले हमले को नाकाम किया जा सकता है।
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बताते चलें कि अमेरिका ने 'काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन्स एक्ट' (सीएएटीएसए) के तहत रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। जिसके अनुसार रूस से रक्षा अथवा खुफिया प्रतिष्ठानों से लेन-देन करने वाले देशों और कंपनियों को दंड देने की बात कही गई है। 
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