भारतीय राजनीति की धुरी बन चुके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सबसे बड़ी खूबी अपने दांवों से अक्सर विपक्ष के नेताओं को चौंकाने की रही है। अगर ये कहा जाए कि वह भारतीय राजनीति के सबसे बड़े बाजीगर बन चुके हैं तो भी गलत न होगा, जब किसी बड़े मुद्दे पर विपक्ष सामने बैठकर माथापच्ची कर रहा होता है तब मोदी कोई न कोई ऐसी चाल चल देते हैं कि सब सिर धुनते रह जाते हैं।
राष्ट्रपति से लेकर उप राष्ट्रपति तक के चुनाव में भी यह बात साबित होती है। उप राष्ट्रपति पद के लिए केंद्रीय मंत्री वेंकैया को उम्मीदवार बनाना बेशक देखने में एक सामान्य प्रक्रिया लगे लेकिन हकीकत ये है कि मोदी ने इस दांव से एक साथ कई शिकार करने की तैयारी कर ली है। वह दांव, जो उनकी आगे की राजनीति को तो आसान करेगा ही पार्टी को भी आने वाले समय में काफी राहत मिल सकती है।
आइए डालते हैं ऐसे ही कुछ मुद्दों पर एक निगाह, जिनसे आप प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी सोच का अंदाजा लगा पाएंगे।
हर मोर्चे पर भाजपा की मुश्किल हल करते रहे हैं वेंकैया
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आंध्र प्रदेश के नेल्लूर जिले के एक किसान परिवार में जन्मे वेंकैया नायडू भाजपा के सबसे बड़े संकटमोचक माने जाते हैं। राज्यसभा में अपना चौथा कार्यकाल गुजारने वाले नायडू ने कई मौकों पर पार्टी को संकट से निकाला है। लेकिन पिछले लंबे समय से प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के लिए सबसे बड़ा संकट रहा है राज्यसभा में सीटों के गणित में पिछड़ने का।
विकास के अपने एजेंडे को देशभर में लागू करने की मुहिम में निकले मोदी के कदम अक्सर राज्यसभा में आकर ठिठक जाते हैं। जीएसटी से लेकर कई बड़े मुद्दों पर भाजपा और मोदी को राज्यसभा में खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। और अगले दो सालों तक भाजपा को इसमें राहत मिलने की भी उम्मीद नहीं है जब तक वह इस उच्च सदन में बहुमत में न आ जाए।
ऐसे में उप राष्ट्रपति पद पर वेंकैया नायडू के चयन के बाद भाजपा इस मोर्चे पर राहत की सांस ले सकती है। राज्यसभा का सभापति होने के नाते परोक्ष रूप से न सही लेकिन अपरोक्ष रूप से वेंकैया भाजपा और एनडीए की काफी मदद कर सकते हैं। किसी भी बड़े मुद्दे पर गतिरोध की स्थिति में वेंकैया का हस्तक्षेप आम सहमति बनाने में मददगार साबित हो सकता है।
पीएम मोदी की राह आसान करेगी वेंकैया की नियुक्ति
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दूसरे, देशभर में भाजपा को स्थापित करने में जुटे प्रधानमंत्री मोदी और उनके सिपहसलार अमित शाह के लिए दक्षिण भारत अभी भी अभेद किला बना हुआ है। हालांकि कर्नाटक में पिछले कुछ समय में पार्टी ने अपने पैर मजबूती से स्थापित किए हैं लेकिन यह अपवाद स्वरूप ही है क्योंकि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य में तो पार्टी खाता खोलने तक के लिए तरसती रहती है। ऐसे में दक्षिण भारत से किसी चेहरे को उप राष्ट्रपति के पद पर पहुंचाना जरूर एक बड़ा संदेश देने का काम करेगा।
वेंकैया नायडू की सबसे बड़ी खूबी विपक्षी दलों के नेताओं से उनके मधुर संबंध भी है। तमाम बड़े दलों और उनके नेताओं तक वेंकैया की सीधी पहुंच है। किसी भी बड़े मुद्दे पर वह विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं से सीधी बात करते रहे हैं, चाहे वह कांग्रेस मुखिया सोनिया गांधी हों या समाजवादी पार्टी के मुखिया रहे मुलायम सिंह।
जदयू और राजद नेताओं से भी उनकी अच्छी पटती है। राजद के मुखिया लालू यादव जहां पूरी भाजपा को पानी पी पीकर कोसते हैं वहीं वेंकैया के नाम पर उनका रुख हमेशा नरम ही रहा है। ऐसे में मोदी सरकार के लिए आने वाले समय में भी वेंकैया तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं जो विपक्षी दलों के चक्रव्यू से सरकार को निकाल सकते हैं।