दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जीवीएल नरसिम्हा राव और भूपेंद्र यादव पर एक व्यक्ति ने जूता फेंक दिया। जूता फेंकने वाले इस शख्स का नाम शक्ति भार्गव है। पेशे से सर्जन और बिल्डर शक्ति के घर और अस्पताल पर आयकर विभाग ने करीब साढ़े चार महीने पहले छापा मारा था। आयकर विभाग को छापे में डॉ. शक्ति भार्गव और उनकी मां डॉ. दया भार्गव के पास से 1.42 लाख रुपये की पुरानी बंद हो चुकी करेंसी मिली थी। इसके लेकर आयकर ने डॉ. शक्ति और डॉ. दया के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।
वहीं, शक्ति की मां डॉ. दया ने कहा कि परिवार ने शक्ति को बेदखल कर दिया है। दया भार्गव ने बताया कि उनका बेटा मानसिक रूप से परेशान है और उनके साथ भी नहीं रहता है। उन्होंने बताया कि शक्ति किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जुड़ा है। शक्ति की पत्नी का नाम शिखा भार्गव है, वह भी डॉक्टर है। बेटे को बचाने की बात पर दया भार्गव ने साफ मना करते हुए कहा कि मेरा उससे कोई संबंध नहीं है।
वहीं, शक्ति भार्गव ने 16 अप्रैल को की गई एक फेसबुक पोस्ट में खुद को व्हिसल ब्लोअर बताते हुए लिखा था, 'पिछले तीन सालों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) के 14 कर्मचारियों ने आत्महत्या की है। नमो ने 2014 में कहा- ना खाऊंगा ना खाने दूंगा। नमो ने 2019 में कहा- सरकार के अंदर भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई आवाज नहीं है।' भार्गव का आरोप है कि वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई है।
भार्गव ने लिखा था, 'एक तरफ लाल इमली मिल के दर्जनों कर्मचारी आत्महत्या को मजबूर हैं। वहीं दूसरी तरफ 11 संपत्तियां जिनकी कीमत 450 करोड़ रुपये हैं, उनके सौदे को साल 2008 में रद्द कर दिया गया था। उसे समझौता धारकों ने 11 करोड़ रुपये में ब्रिटिश इंडिया कंपनी के पास गिरवी रखा हुआ है।'
पोस्ट में भार्गव ने बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव का जिक्र किया था। यादव ने 2017 में एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने खराब खाने की शिकायत की थी। तथ्यों को सामने लाने के उनके साहस की प्रशंसा की जानी चाहिए थी। उन्होंने जवानों को मिलने वाले खाने में हो रहे भ्रष्टाचार को उठाया था। इसके बजाए उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निकाल दिया गया।
भार्गव ने पोस्ट में लिखा, भारत सरकार की कंपनी ब्रिटिश इंडिया कंपनी द्वारा अचल संपत्तियों की बिक्री में अनियमितताओं का अनुसरण कर रहा हूं। जिसे लाल इमली मिल्स के नाम से जाना जाता है। यह मामला भारत सरकार के अधिकारियों के बहुत ही घृणित रवैये का उदाहरण है। जिसमें पीएमओ, सीवीसी, सीबीआई और कपड़ा मंत्रालय शामिल है, जिसने संपत्तियों की बिक्री में भ्रष्टाचार होने दिया।
भूमाफियाओं का जिक्र करते हुए भार्गव ने लिखा था कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय जिस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है उसमें विवरण दिया गया है कि कैसे सरकारी अधिकारियों ने भूमाफियाओं के लिए एजेंट के तौर पर काम किया। उन्होंने संयुक्त रूप से सरकारी कंपनी से संबंधित खास संपत्तियों को लूटने की साजिश की। इसमें 14 कर्मचारियों द्वारा की गई आत्महत्या का भी विवरण दिया गया है।