क्या हैक और रीप्रोगामिंग हो सकती है ईवीएम
राजनीतिक दलों ने कई बार ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। उत्तररप्रदेश में मंगलवार को हुए चुनावों में भी एक बार फिर से वीवीपैट की बजाए बैलट पेपर के जरिए चुनाव करवाने की मांग उठी। हालांकि चुनाव आयोग का दावा है कि ईवीएम सुरक्षित और सही है।
आपको बता दें कि हर ईवीएम के दो हिस्से होते हैं। एक हिस्सा होता है बैलेटिंग यूनिट का होता है जो मतदाताओं के लिए होता है। वहीं दूसरा होता कंट्रोल यूनिट का होता है जो पोलिंग अफसरों के लिए होता है। ईवीएम के दोंनो हिस्से एक पांच मीटर लंबे तार से जुड़े रहते हैं। बैलेट यूनिट ऐसी जगह रखी होती जहां कोई एक मतदाता दूसरे मतादाता को वोट डालते समय देख ना सके।
ईवीएम पर एक बार में अधिकतम 64 प्रत्याशी तक दर्शाए जा सकते हैं। एक चुनाव अधिकारी कुणाल ने बताया, 'ईवीएम चिप आधारित मशीन है, जिसे केवल एक बार प्रोग्राम किया जा सकता है। उसी प्रोग्राम से तमाम डेटा को स्टोर किया जा सकते है लेकिन इन डेटा की कहीं से किसी तरह की कनेक्टिविटी नहीं है लिहाजा, ईवीएम में किसी तरह की हैकिंग या रीप्रोग्रामिंग मुमकिन ही नहीं है। इसलिए यह पूरी तरह सुरक्षित है।' भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड या इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड के इंजीनियर इन मशीनों की चेकिंग करते हैं। उनमें उम्मीदवारों के नाम, उनके चिह्न वगैरह फीड किए जाते हैं। मशीनों को जब मत डालने के लिए भेजा जाता है तो उससे पहले भी इसकी चेकिंग होता है।
थर्ड जनरेशन वीवीपैट
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान पहली बार थर्ड जनरेशन ईवीएम मशीनों का उपयोग किया गया था। इसपर आयोग का कहना था कि इसमें लगी चिप को सिर्फ एक बार प्रोग्राम किया जा सकता है। चिप के सॉफ्टवेयर कोड को ना तो पढ़ा जा सकता और ना ही इसे दोबारा लिखा जा सकता है। इसे किसी इंटरनेट या सॉफटवेयर के जरिए भी नियंत्रित नहीं किया जा सकता। आयोग ने दावा किया था कि इनके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ होने पर यह अपने आप बंद हो जाती हैं।