डाक मतदान का चलन हमारे देश में काफी समय से चला आ रहा है। इस व्यवस्था को उन मतदाताओं द्वारा प्रयोग में लाया जाता है जो विभिन्न कारणों से अपने क्षेत्र में वोट डालने के लिए प्रत्यक्ष रूप में उपस्थित नहीं हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग इन मतदाताओं को डाक मतदान के माध्यम से वोट डालने की सुविधा उपलब्ध कराता है।
वक्त के साथ-साथ इसकी व्यवस्थाओं को भी अपडेट किया जाता रहा है। अब डाक मतदान ई-डाक मतदान प्रणाली से भी होने लगा है। इसके साथ ही हर चुनाव में जब मतपत्रों की गणना की जाती है तो सर्वप्रथम डाक मतपत्रों को ही गिना जाता है।
इस व्यवस्था का उपयोग चुनाव ड्यूटी में सेवा देने वाले अधिकारी, भारत सरकार के सशस्त्र बलों के कर्मचारी, देश के बाहर कार्यरत सरकारी अधिकारी, सेना अधिनियम 1950 के तहत ओने वाले सभी बल के द्वारा किया जाता है।
यह है प्रक्रिया
चुनाव आयोग द्वारा हर चुनावी क्षेत्र में डाक मतदान करने वालों की संख्या पहले से निर्धारित की जा चुकी होती है। इस प्रकिया में सबसे पहले खाली डाक मतपत्र को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से मतदाता तक पहुंचाया जाता है।
अगर मतदाता किसी ऐसी जगह है जहां इलेक्ट्रॉनिक तरीके का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है तो वहां डाक सेवा के माध्यम से मतपत्र को भेजा जाता है। यदि किसी कारण से मतदाता अपने इस अधिकार का प्रयोग नहीं कर पाता है तो यह मतपत्र लौट आता है।
कब से हुई शुरूआत
21 अक्टूबर, 2016 को भारत सरकार द्वारा चुनाव नियामावली, 1961 के नियम 23 में संशोधन कर इस सेवा को मतदाताओं हेतु अधिसूचना जारी कर शुरू किया गया था। इसके बाद ई-डाक के माध्यम से मतदान करने की सुविधा शुरू हुई।