यूलिप की अनिवार्य लॉक-इन अवधि पांच वर्षों की होती हैं, जहां ग्राहक अपने प्रीमियम का भुगतान मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर कर सकते हैं। इससे ग्राहक के लिए दो चीजें होती हैं। एक तो यह कि ये प्रीमियम भुगतान समय के अनुसार स्वत: थोड़ा वित्तीय अनुशासन लाता है। दूसरा, यह स्वत: ही ग्राहकों को दीर्घकालिक बाजार गतिविधि का लाभ उठाने में मदद करता है। लॉक-इन अवधि के चलते, ग्राहकों को बेहतर फंड प्रदर्शन प्राप्त होता है।
लोकप्रिय निवेश उत्पादों को मात देने वाला फंड प्रदर्शन
वर्षों से यूलिप के प्रदर्शन का ट्रैक रिकॉर्ड उत्पाद द्वारा उपलब्ध कराये जाने वाले दमदार प्रस्ताव का सबूत है। बड़ी पूंजीकरण वाले इक्विटी यूलिप्स का औसत श्रेणीवार रिटर्न लगभग 15 फीसदी सीएजीआर रहा है और मझोली व छोटी पूंजीकरण वाले यूलिप ने लगभग 24 फीसदी सीएजीआर का औसत श्रेणीवार रिटर्न प्रदान किया है।
कर लाभ
जब ग्राहक यूलिप में निवेश करते हैं, तो उन्हें अपने पोर्टफोलियो को पुनर्संतुलित करने का लाभ भी मिलता है। इसका अर्थ यह है कि यदि ग्राहक इक्विटी से डेट फंड या डेट फंड से इक्विटी में जाना चाहे, तो वो अपनी इच्छानुसार इसे आसानी से कर सकता है। एक फंड से दूसरे फंड में जाने की इस सुविधा के लिए कोई शुल्क नहीं है।
यूलिप को हमेशा आयकर कानून की धारा 10 -10डी- और धारा 80सी के तहत कर से छूट रहा है। चूंकि यह पांच वर्ष की लॉक-इन अवधि वाला दीर्घकालिक निवेश है, इसे ध्यान में रखते हुए, नई कर संरचना लाई जाने के बाद से वे और अधिक आकर्षक हो चुकी हैं।
(तरूण चुघ, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस)