केंद्र सरकार ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सामान्य वर्ग के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया। सरकार के इस कदम को मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा है। तो कुछ लोगों का कहना है कि ये फैसला सरकार ने पहले क्यों नहीं लिया, चुनाव से कुछ ही समय पहले क्यों लिया? वजह चाहे जो हो, इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। अब इस संबंध में संसद में बिल पेश किया जाएगा।
आरक्षण हमेशा से ही एक ऐसा मुद्दा रहा है, जो सिसायत को नया मोड़ देने के लिए अहम साबित हुआ है। चाहे फिर नब्बे के दशक में मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू किए जाना ही क्यों न रहा हो। इस रिपोर्ट के लागू होने के बाद देश में भारी हिंसक प्रदर्शन तक हुए थे। राजनीति में चल रही आरक्षण की ये कहानी आज की नहीं है बल्कि आजादी से पहले से चली आ रही है। चलिए आपको विस्तार से बताते हैं इस कहानी के बारे में-