भारत का महत्वाकांक्षी मून मिशन चंद्रयान शुक्रवार देर रात चांद से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर आकर खो गया। चांद की सतह की ओर बढ़ा लैंडर विक्रम का चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले संपर्क टूट गया। हालांकि उम्मीद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अब सारी जिम्मेदारी ऑर्बिटर के ऊपर है।
बता दें कि चंद्रयान-2 के तीन हिस्से थे। पहला ऑर्बिटर, दूसरा लैंडर विक्रम और तीसरा रोवर प्रज्ञान। फिलहाल लैंडर-रोवर से संपर्क भले ही टूट गया है, लेकिन ऑर्बिटर से उम्मीदें अब भी कायम हैं। लैंडर-रोवर को दो सिंतबर को ऑर्बिटर से अलग किया गया था। ऑर्बिटर इस समय चांद से करीब 100 किलोमीटर ऊंची कक्षा में चक्कर लगा रहा है। चलिए इस मिशन के घटनाक्रम के बारे में विस्तार से जानते हैं:
- 12 जून- इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने घोषणा कर कहा कि चंद्रमा पर जाने के लिए भारत के दूसरे मिशन चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को प्रक्षेपित किया जाएगा।
- 29 जून- सभी परीक्षणों के बाद रोवर को लैंडर विक्रम से जोड़ा गया।
- 29 जून- लैंडर विक्रम को ऑर्बिटर से जोड़ा गया।
- 4 जुलाई- चंद्रयान-2 को प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी एमके तृतीय-एम1) से जोड़ने का काम पूरा किया गया।
- 7 जुलाई- जीएसएलवी एमके तृतीय-एम1 को लॉन्च पैड पर लाया गया।