शीबा जब यूपी के बदायूं में रहती थी तो उसके साथ बडा हादसा हो गया। उसके मुताबिक मिट्टी के तेल से भरा लैंप मेरे उपर गिर गया था। उस वक्त मेरी उम्र करीब दस साल रही होगी। चेहरे से लेकर पेट तक का हिस्सा जल चुका था। परिवार को छोड़ दें तो बाकी लोग धीरे-धीरे किनारा करने लगे थे। सातवीं कक्षा में स्कूल छूट गया। एक बार तो ऐसा भी लगा, जैसे कि कोई साथ ही नहीं दे रहा है।
अब शादी में भी दिक्कत आ रही हैं। देखने वाले आते हैं, चेहरे की ओर निहारते हैं और बाद में बिना कोई जवाब दिए चुपके से निकल जाते हैं। दो साल अस्पताल में रहने और उसके बाद घर पर भी करीब सात वर्ष ईलाज चला। चार भाई और चार बहनें, इन्हें भी तो देखना है। अब ऐसे में कोई प्लास्टिक सर्जरी की सोचे भी तो कैसे सोचे।
भारत में स्किन बैंक की कमी है
डॉ. राजीव बी आहूजा का कहना है कि विदेशों में स्किन बैंक खुलने लगे हैं, लेकिन भारत में अभी यह लोगों के लिए एक कौतूहल का विषय बना है। कोई भी इस तरफ देखना या सोचना पसंद नहीं कर रहा है। सरकार की ओर से लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए कुछ नहीं हो रहा है। हमारे देश में चेहरे की सर्जरी करानी है तो कम से कम 25-30 लाख रुपये लग जाते हैं। यह इलाज सबके वश में नहीं है। इसके लिए सरकार और बड़े औद्योगिक घरानों को आगे आने होगा। वे अत्याधुनिक अस्पताल बनवाएं या फिर वर्तमान अस्प्तालों में प्लास्टिक सर्जरी जैसे इलाज को सस्ता करा दें।