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क्या होती है दया याचिका, जानें इससे जुड़े रोचक तथ्य

रमा सोलंकी
Updated Wed, 29 Jan 2020 11:35 AM IST

सार

  • दया याचिका के बारे में 5 जरूरी बातें
  • क्या कहता है भारतीय संविधान का अनुच्छेद 72
  • दया याचिका दायर करने की प्रक्रिया
  • दया याचिका से जुड़े रोचक तथ्य
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दया याचिका - फोटो : Amar Ujala

निर्भया गैंगरेप मामले में दोषियों को सजा-ए-मौत तय होते ही देशभर में सुकून की लहर छाने लगी। लेकिन फिर शुरू हुआ दया और क्षमा याचिकाओं का दौर, जो अब भी जारी है। यूं तो तिहाड़ जेल में फांसी की तैयारी लगभग पूरी ही है, लेकिन दोषी अब तक दया का सहारा लेकर अपनी सांसें बढ़ा रहे हैं। निर्भया के दो गुनहगारों विनय शर्मा और मुकेश कुमार ने क्यूरेटिव पिटीशन (सुधारात्मक याचिका) दायर की थी लेकिन वह खारिज हो गई। इसी के साथ हाईकोर्ट ने मुकेश के डेथ वारंट पर रोक लगाने वाली याचिका को भी निलंबित कर दिया। अब इनके सामने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने का रास्ता ही बचा था। दोषियों में से एक पवन गुप्ता की याचिका को राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया। अब सवाल यह उठता है कि आखिर दया याचिका और इसकी प्रक्रिया क्या होती है।

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दया याचिका - फोटो : Amar Ujala
निर्भया गैंगरेप मामले में दोषियों को सजा-ए-मौत तय होते ही देशभर में सुकून की लहर छाने लगी। लेकिन फिर शुरू हुआ दया और क्षमा याचिकाओं का दौर, जो अब भी जारी है। यूं तो तिहाड़ जेल में फांसी की तैयारी लगभग पूरी ही है, लेकिन दोषी अब तक दया का सहारा लेकर अपनी सांसें बढ़ा रहे हैं। निर्भया के दो गुनहगारों विनय शर्मा और मुकेश कुमार ने क्यूरेटिव पिटीशन (सुधारात्मक याचिका) दायर की थी लेकिन वह खारिज हो गई। इसी के साथ हाईकोर्ट ने मुकेश के डेथ वारंट पर रोक लगाने वाली याचिका को भी निलंबित कर दिया। अब इनके सामने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने का रास्ता ही बचा था। दोषियों में से एक पवन गुप्ता की याचिका को राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया। अब सवाल यह उठता है कि आखिर दया याचिका और इसकी प्रक्रिया क्या होती है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 में राष्ट्रपति को अपराधी को माफ करने की शक्ति प्रदान की गई है।

दया याचिका - फोटो : Amar Ujala
क्या होती है दया याचिका
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 में राष्ट्रपति को अपराधी को माफ करने की शक्ति प्रदान की गई है। जिसके आधार पर वह निर्णय ले सकता है जो कि निम्नलिखित मामलों में दोषी पाए गए हों:
  • किसी भी जघन्य अपराध के लिए अगर मौत की सजा मिली हो
  • न्यायालय के द्वारा दंड दिया गया हो
  • सजा को माफ करना
  • सजा को कम करना
  • दंड की अवधि कम करना
  • वाक्य पर विराम लगाना
  • राष्ट्रपति विशेषकर मृत्युदंड निलंबित कर सकते हैं।

दया याचिका के बारे में 5 जरूरी बातें

दया याचिका - फोटो : Amar Ujala
1 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 के मुताबिक, भारत के राष्ट्रपति किसी की फांसी की सजा को माफ कर सकते हैं।
  • उसको स्थगित कर सकते हैं।
  • उसकी अवधि कम कर सकते हैं।
  • उसकी सजा में बदलाव कर सकते हैं।
  • उसकी दया याचिका के आग्रह पर विचार करके उस पर अपनी विशेष प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

 यह अधिकार राष्ट्रपति का है लेकिन वह अपनी मर्जी से ऐसा नहीं कर सकते हैं, क्योंकि संविधान में स्पष्ट लिखा हुआ है कि राष्ट्रपति, मंत्री परिषद से सलाह लेकर ही किसी की सजा को माफ कर सकते हैं या उसकी सजा में छूट दे सकते हैं। वो अकेले यह निर्णय नहीं कर सकते हैं। एक तरह से यह संयुक्त निर्णय होता है।

2 जब सुप्रीम कोर्ट से किसी दोषी को फांसी की सजा मिलती है तो वह अपनी दया याचिका दाखिल कर सकता है
  • राष्ट्रपति के दफ्तर में वह दया याचिका भेज सकता है।
  • गृह मंत्रालय को अपनी दया याचिका भेज सकता है।
  • संबंधित राज्य के राज्यपाल को भी वह अपनी दया याचिका भेज सकता है।
  • राज्यपाल उस दया याचिका को गृह मंत्रालय को भेज देते हैं, इस तरह से यह प्रक्रिया शुरू होती है।  

3 दोषी शख्स अपनी दया याचिका चार माध्यमों से भेज सकता है
  • संबंधित अधिकारियों के जरिए, वह अपनी दया याचिका अधिकारी के द्वारा भी भेज सकता है।
  • अपने वकील के द्वारा।
  • परिवार के सदस्यों के माध्यम से।
  • ईमेल के जरिए भी याचिकाएं गृह मंत्रालय या राष्ट्रपति के दफ्तर भेजी जा सकती हैं।
  • दया याचिका के लिए कोई समय सीमा तय नहीं होती है और राष्ट्रपति अपने समय, कार्य प्राथमिकता और बाध्यता के अनुसार उस पर विचार करते हैं। राष्ट्रपति और गृह मंत्रालय के पास याचिकाएं लंबित रहती हैं क्योंकि इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है।

4  एक आरटीआई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1991 से 2010 के बीच 77 दया याचिकाएं राष्ट्रपति को प्राप्त हुईं जिनमें से 69 को खारिज कर दिया गया था और 8 दया याचिकाओं पर फैसला लिया गया। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने कार्यकाल में केवल दो दया याचिका पर फैसला लिया था जिसमें से एक साल 2006 में खीरज राम की फांसी की सजा को कम करके उम्रकैद में बदल दिया गया था और 2004 में दुष्कर्म और हत्या के दोषी धनंजय चटर्जी की दया याचिका को उन्होंने खारिज किया था।

दया याचिका दायर करने की प्रक्रिया क्या है

दया याचिका - फोटो : Amar Ujala
जब किसी अपराधी को फांसी की सजा मिलती है और उसे सुप्रीम कोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिलती है, तो वह राष्ट्रपति के दफ्तर में अपनी याचिका भेज सकता है।

1- दया याचिका आवेदन करने वाले अपराधी को राष्ट्रपति से मौखिक परीक्षण का अधिकार प्राप्त नहीं है।
2- राष्ट्रपति उस व्यक्ति के साक्ष्य का दोबारा से अध्ययन कर सकते हैं और उस पर अपना मत रख सकते हैं।
3- राष्ट्रपति कुछ विषयों पर पुन: विचार कर सकते हैं,
  • अपराधी की सामाजिक परिस्थिति
  • मानवीय आधार
  • चाल-चलन
राष्ट्रपति अपराधी की सजा को कम कर सकते हैं, फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल भी सकते हैं या उसकी सजा में परिवर्तन भी कर सकते हैं।
4-  राष्ट्रपति के निर्णय की कोई भी न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती है।
5-  अगर क्षमा दान की पूर्व याचिका राष्ट्रपति रद्द कर चुके हों तो व्यक्ति द्वारा दूसरी याचिका दायर नहीं की जा सकती है।
 

दया याचिका से जुड़े रोचक तथ्य

दया याचिका - फोटो : Amar Ujala
  • भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने 181 दोषियों में से 180 की सजा को आजीवन कारावास में बदला था। 
  • राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने एक दया याचिका खारिज भी की थी। 
  • डॉ. जाकिर हुसैन और वीवी गिरि ने अपने कार्यकाल में मृत्युदंड आजीवन कारावास में बदल दिया था। 
  • ज्ञानी जैल सिंह ने 32 में से 30 याचिकाएं खारिज की थीं। 
  • शंकर दयाल शर्मा ने अपने कार्यकाल में सभी दया याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
  • देश में सबसे ज्यादा दया याचिकाएं खारिज करने का रिकॉर्ड राष्ट्रपति आर वेंकटरमण के नाम दर्ज है। वर्ष 1987-1992 के बीच उन्होंने 44 दया याचिकाएं खारिज कर दी थीं।  
  • देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने अपने कार्यकाल में 30 दोषियों की दया याचिकाएं स्वीकार की थीं।
आश्चर्यजनक तथ्य
  • विश्व के करीब 99 देश मृत्युदंड की सजा नहीं देते हैं।
  • दुनिया के 58 देशों में आज भी मृत्युदंड की सजा दी जाती है।
  • वर्ष 2015 फिजी, सूरीनाम और मेडागास्कर ने मृत्युदंड की सजा का प्रावधान अपने देश से समाप्त कर दिया था।
  • भारत ने पिछले दस साल में 4 लोगों को फांसी पर लटकाया है। जिसमें धनंजय चटर्जी (2004), अजमल कसाब (2012), अफजल गुरु (2013), याकूब मेमन (2015) है। 
  • विगत वर्षों में भारत ने करीब 1310 लोगों को फांसी की सजा सुनाई है। 
  • जिसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश से 395, बिहार में 144, महाराष्ट्र में 129, तमिलनाडु में 106, कर्नाटक में 106 लोगों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।
  • वर्ष 1977 में दुनिया के 6 देशों ने मृत्यदंड निषेध कर दिया है।
  • भारत सहित दुनिया के 33 देशों में मृत्युदंड का तरीका एक जैसा है।
  • मौत की सजा के तहत 45 देश गोली मारकर जान लेते हैं।
  • दुनिया के 6 देश पत्थर मारकर मृत्युदंड देते हैं।
  • दुनिया में 5 देश इंजेक्शन लगाकर मृत्युदंड की सजा देते हैं।

Bibliograpy and  References 
Legal Expert ( Supreme Court Lawyers ) 
भारतीय दण्ड संहिता, 1860
भारतीय संविधान ( क्या कहता है भारतीय संविधान का अनुच्छेद 72 )
अमर उजाला, 2 सितंबर, 2015, पृृ. 16
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