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जानिए क्या है काला धन और इससे कैसे प्रभावित होती है देश की अर्थव्यवस्था

Wed, 10 Apr 2019 08:28 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : www.pexels.com
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अवैध तरीकों से अर्जित किया गया धन काला धन या ब्लैक मनी ( Black Money ) कहलाता है। कर योग्य वह धन जिस पर कर न दिया गया हो वह भी काले धन की श्रेणी में आता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनांस एंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) के अनुसार, 'काला धन वह राशि है जिस पर कर की देनदारी तो बनती है लेकिन उसकी जानकारी कर विभाग को नहीं दी जाती है।' काला धन सरकार की आय में रुकावटें तो उत्पन्न करता ही है, साथ ही देश के सीमित वित्तीय साधनों को अवांछित दिशाओं में मोड़ देता है। 
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काले धन की समस्या सामान्य दिक्कतों से अलग है क्योंकि जब हम सामान्य आर्थिक समस्याओं, जैसे- गरीबी, मुद्रास्फीति या बेरोजगारी पर विचार करते हैं तो हमारा ध्यान निर्धन और बेरोजगारों के समूह पर केंद्रित हो जाता है। वहीं, जब हम काले धन की समस्याओं पर विचार करते हैं तो एक विशेषता दिखती है कि इसमें काले धन को रखने वाला व्यक्ति या समूह कतई प्रभावित नहीं होता बल्कि इसका प्रभाव इससे वंचित रह गए लोगों और सरकार पर पड़ता है। 

इस तरह बनता है काला धन

काला धन कई तरीकों से उत्पन्न होता है। इनमें मुख्यत: दो तरीके आते हैं, आपराधिक गतिविधियां और आय छुपाकर। पहले बात करते हैं आपराधित गतिविधियों की। इसमें अवैध साधनों-संसाधनों का इस्तेमाल कर जुटाई गई राशि काला धन कहलाती है। इसमें अपहरण, तस्करी, नशीली दवाएं, अवेध खनन, जालसाजी और घोटाले मुख्य रूप से आते हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार जैसे रिश्वतखोरी और चोरी भी काले धन का प्रमुख स्त्रोत है। 

काले धन की उत्पत्ति का दूसरा स्त्रोत है कर बचाने के लिए आय की जानकारी विभाग को नहीं देना। जैसे कि यदि किसी व्यक्ति की वार्षिक आय आयकर के अंतर्गत है तो वह आयकर की राशि को बचाने के लिए अपनी वास्तविक आय के स्थान पर कम आय को दर्शाता है। यह अंतर (वास्तविक आय और घोषित आय के बीच अंतर) काला धन कहलाता है। देश में काले धन के पैदा होने की सबसे बड़ा कारण यही है। 

इस तरह लगाया जाता है काले धन का अनुमान

काले धन का पता लगाने का एक तरीका निवेश-उत्पाद अनुपात (इनपुट-आउटपुट रेशियो) है। उदाहरण के लिए किसी देश में एक राशि के निवेश (इनपुट) पर एक विशेष मात्रा में उत्पादन (प्रोडक्शन) होता है। यदि इसका उत्पाद (आउटपुट) कम है तो इसका मतलब है कि निवेश राशि का एक हिस्सा काले धन में परिवर्तित हो रहा है। हालांकि, अर्थव्यवस्था के ढांचे में बदलाव, क्षमता में बढ़ोत्तरी और तकनीकी उन्नत होने पर यह तरीका कारगर नहीं रह पाता है। 

काले धन का पता लगाने का दूसरा तरीका अर्थव्यवस्था के आकार के हिसाब से मुद्रा परिसंचरण (करेंसी सर्कुलेशन) की तुलना करना है। यह तरीका इस फार्मूला पर चलता है कि मुद्रा का इस्तेमाल सामान्य और समानांतर अर्थव्यवस्था दोनों में ही होता है। ऐसे में छोटी अर्थव्यवस्था में ज्यादा करेंसी सर्कुलेशन यह बताता है कि वहां समानांतर अर्थव्यवस्था भी मौजूद है। हालांकि, ऐसे अनुमान में असंगठित क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नियमित अर्थव्यवस्था में शामिल नहीं किया जाता है।

भारत मे काले धन की स्थिति

काले धन और काली अर्थव्यवस्था (ब्लैक इकोनॉमी) को मापने का कोई सटीक पैमाना या तरीका नहीं है। ज्यादातर तरीके पुराने हैं और उनमें कई तरह की खामियां हैं। एनआईपीएफपी के एक अध्ययन के मुताबिक, देश में साल 1983-84 में 32,000 से 37,000 करोड़ रुपए का काला धन था। वहीं, साल 2010 में अमेरिका की ग्लोबल फाइनेंशियल इंटीग्रिटी ने अनुमान लगाया था कि 1948 से 2008 के बीच भारत से 462 अरब डॉलर की रकम बाहर गई है। 

इस तरह सरकार लगा रही है काले धन पर रोक

काले धन को सामने लाने के लिए वर्तमान और पिछली सरकारों ने मौजूदा संस्थानों को मजबूत करने के साथ नए संस्थान और नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। एंटी मनी लॉन्ड्रिंग (धनशोधन रोधी) कानून को मजबूत बनाया गया है। काले धन को रोकने के लिए भारत वैश्विक मुहिम का भी भाग बना है। काले धन से संबंधित सूचनाएं साझा करने के लिए भारत ने कई देशों से समझौते भी किए हैं। 
 
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इन तरीकों से लगाई जा सकती है काले धन पर रोक

  • कर प्रणाली यथार्थवादी होनी चाहिए। लोगों को इसे बोझ के रूप में नहीं देखना चाहिए। उच्च कर की दर लोगों को कर चोरी के तरीकों की ओर जाने में ही मदद करेगी। 
  • कर संग्रह की प्रक्रिया को और अधिक बेहतर बनाना चाहिए। सरकार को इस कार्य के प्रति समर्पित और ईमानदार अधिकारियों के लिए कुछ कदम उठाने चाहिए ताकि और लोगों को भी इसे गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित किया जा सके।
  • सरकार को मूल्य नियंत्रण नीति पर काम करना चाहिए। यह काले धन के जमा होने के प्रमुख कारणों में से एक है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं पर नियमित रूप से नजर रखी जानी चाहिए ताकि उनका खर्च कम हो।
  • निजी क्षेत्र के निवेश व्यय का भी प्रभावी ढंग से निरीक्षण किया जाना चाहिए।
  • सरकार को भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो काले धन के विकास में कई तरह से योगदान करते हैं।

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