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तीन तलाकः 10 प्वाइंट में जानिए इसके पास होने की कहानी

Thu, 28 Dec 2017 08:25 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
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तीन तलाक बिल गुरुवार को भारी हंगामे के बीच लोकसभा में पास हो गया जिसके बाद मुस्लिम महिलाओं में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। विधेयक में एक साथ तीन तलाक देने वाले पति को तीन साल तक जेल और जुर्माने की सजा का प्रावधान है। आइए जानते हैं आज की चर्चा से जुड़ी 10 बातें-
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1. कांग्रेस ने कहा कि उसे इसके आपराधिक प्रावधानों पर आपत्ति है। उसने इसे स्थायी समिति में भेजने और इसके आपराधिक प्रावधान को दीवानी मामले में बदलने की अपील की। बिल का शुरू में विरोध कर रही तृणमूल कांग्रेस इस दौरान चुप रही। 

2. एआईएमआईएम सांसद असदउद्दीन ओबैसी ने विधेयक को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। यह स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत है। मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय वाला विधेयक। विधेयक में मौलिक सुसंगति का अभाव है।
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3. बीजेडी के भर्तृहरि मेहताब ने कहा कि विधेयक में कई खामियां है और प्रावधानों में विरोधाभास है।

4. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि हर कोई महिलाओं को अधिकार देने के पक्ष में है, लेकिन सरकार ने विधेयक बनाने में किसी स्टेकहोल्डर से चर्चा नहीं की। विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए था।

5. कांग्रेस की ही सुष्मिता देव ने कहा कि विधेयक में कहा गया है महिलाओं को भरणपोषण का अधिकार है लेकिन सरकार यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि महिलाओं को भरणपोषण मिले।

6. विपक्ष के आरोपों के बाद कंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जवाब दिया। कहा कि यह विधेयक नारी सशक्तिकरण, नारी न्याय और नारी सम्मान की दिशा में एक अहम कदम। यह विधेयक पूजा, प्रार्थना या धर्म या समुदाय से नहीं जुड़ा है बल्कि यह लैंगिक समानता और नारी सम्मान व नारी न्याय का मसला है। इस विधेयक को न तो राजनीति और न ही धर्म की तराजू पर तौला जाए क्योंकि यह नारी स्वाभिमान और उसकेअधिकारों से जुड़ा है। शर्रियत में भी कोई दखल नहीं दी जा रही है। उन्होंने इस बिल को राजनीतिक चश्मे से न देखने की अपील की।

7. भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि जिस तरह सती प्रथा के चश्मदीदों की तर्ज पर तीन तलाक में सहयोग करने वाले मौलानाओं पर भी दर्ज हो मुकदमा। 

8. बिल पर असदुद्दीन ओवैसी ने दो संशोधन की मांग की। हंगामे के बाद देर शाम वोटिंग के जरिये विधेयक के सभी संशोधन भी खारिज हो गए। उनके संशोधनों के पक्ष में सिर्फ दो वोट पड़े।

9. दो वोटों के मुकाबले 241 मतों के भारी अंतर से खारिज कर दिया गया, जबकि 4 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। 

10. बिल के कानून बन जाने के बाद एक साथ तीन तलाक कहने, लिखित रूप में देने या ईमेल, एसएमएस तथा व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से तीन तलाक देने को गैरकानूनी और अमान्य करार दिया जाएगा।  
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