सीबीआई प्रकरण की परतें जैसे जैसे खुल रही हैं, वैसे ही चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आ रहे हैं। खुलासा हुआ है कि देश की तीन सीक्रेट एजेंसियां भी सीबीआई प्रकरण से जुड़ गई थी। हालांकि इन एजेंसियों की सीधे तौर सीबीआई मामले में कोई भूमिका नहीं थी, लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर इनका इस्तेमाल किया गया है। सूत्रों का दावा है कि रॉ, आईबी और ‘एनएसए-एनटीआरओ’ का सीबीआई केस में अलग-अलग तरह से रोल देखा गया है।
मोईन कुरैशी मामले में सीबीआई निदेशक राकेश अस्थाना एवं दूसरे आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होने के बाद नहीं, बल्कि ये एजेंसियां अगस्त माह से ही सीबीआई मामले में सक्रिय हो गई थी। ध्यान रहे कि सीबीआई के विशेष निदेशक अस्थाना ने अगस्त में पहली बार कैबिनेट सचिव और सीवीसी को जब आलोक वर्मा की शिकायत भेजी, तभी से ही पीएमओ और डीओपीटी के निर्देश पर सीक्रेट एजेंसियां सक्रिय हो गई थी।
खास बात है कि मोईन कुरैशी केस में तो सीबीआई के अंदर भी फोन कॉल रिकॉर्ड हुई हैं। एक तरफ तो टॉप बॉस और सेकेंड बॉस ने कथित तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ ही रिकॉर्डिंग कराई, जबकि दूसरी ओर रॉ-एनटीआरओ व आईबी भी सीबीआई के घटनाक्रम पर नजर रख रही थी।
सूत्रों का कहना है कि पीएमओ और डीओपीटी के इशारे पर देश की एक अहम सीक्रेट एजेंसी विदेशी (मामले) और टॉप नौकरशाह की विंग के साथ अटैच एक अन्य एजेंसी भी इस मामले में कूद गई थी। आरोपी मनोज और सोमेश के साथ रॉ के विशेष सचिव सामंत गोयल और राकेश अस्थाना की बातचीत दो एजेंसियों द्वारा रिकॉर्ड की गई थी। सोमवार को सीबीआई अधिकारी एमके सिन्हा द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लगाई गई याचिका में भी यह खुलासा हुआ है।