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तो इस तरह शरीर में वायरस को खत्म करने में जुट जाती है दवा

अमर उजाला रिसर्च टीम Published by: Amit Mandal Updated Wed, 10 Jun 2020 03:14 PM IST
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शरीर का सिस्टम सही जगह पहुंचाती है दवा - फोटो : Pixabay

कोरोना वायरस की अब तक कोई दवा नहीं बनी है। दूसरी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवा से ही चिकित्सक इलाज कर रहे हैं। पर आपने कभी यह सोचा है कि एक छोटी सी दवा शरीर में पहुंचकर कैसे रोग को ठीक कर देती है और आप सामान्य जीवन जीने लगते हैं। मनुष्य में होने वाली बीमारियों के मैकेनिज्म पर करीब से अध्ययन करने वाले प्रो. डॉक्टर स्टीवन प्रेसकॉट बताते हैं कि दवाओं को कुछ नहीं पता होता कि उन्हें जब कोई लेगा तो कैसे काम करना है। लेकिन वह उस वायरस, बैक्टीरिया, फंगल इनफेक्शन को पकड़ लेती हैं और उसे ठीक करने की पूरी कोशिश करती हैं।



हर दवा रिसेप्टर को टारगेट कर बनती है

डॉक्टर प्रेसकॉट के अनुसार, जो भी दवा रक्त के जरिए पूरे शरीर में जाती है, उसे तैयार करते वक्त शरीर में मौजूद रिसेप्टर्स को टारगेट कर तैयार किया जाता है। जैसे कि अगर किसी को दर्द हो रहा है तो दवा रक्त के जरिए अलग-अलग हिस्सों में पहुंचती है तो वह उसे रिसेप्टर को ढूंढती है जिसकी वजह से दर्द हो रहा है। वहां पर दवा का जरूरी तत्व छोड़कर रिसेप्टर को ठीक करने में लग जाती है। शरीर की तकलीफ दूर होते ही दवा का गैर जरूरी हिस्सा यूरिन से बाहर निकल जाता है। इससे शरीर के दूसरे अंगों या कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं होता है।


शरीर का सिस्टम सही जगह पहुंचाती है दवा

डॉ. स्टीफन के अनुसार, शरीर को कुदरती शक्ति मिली है कि वह तय कर लेता है कि भीतर पहुंची दवा को किस जगह पहुंचाना है। दवा खाने के बाद वहीं असर करती है जहां तकलीफ होती है। वह बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति दवा खाता है तो सबसे पहले वह पेट में जाती है इसके बाद आदमी और फिर जिगर में प्रवेश करती है। इसके बाद वह टूट जाती है और उसमें मौजूद सभी जरूरी तत्व रक्त में मिल जाते हैं। इससे शरीर की सभी कोशिकाओं में दवा पहुंचती है और अपना काम करना शुरू कर देती है।


आखिर क्यों कोरोना सब बेअसर कर रहा

मनुष्यों की कोशिकाओं से तुलना की जाएगी तो वायरस की कोशिकाएं बहुत छोटी होती हैं। यह खुद से अपने आप को नहीं बढ़ा सकता है। वायरस शरीर पर हावी होने के लिए शरीर को उसी के खिलाफ काम करने के लिए विवश करता है। शरीर की कोशिकाएं दूसरी वस्तुओं का प्रवेश न हो, इसके लिए पूरी तरह बंद रहती हैं। लेकिन कोरोना अपने प्रोटीन के जरिए उन्हें खोलता है और उसमें घुसकर अपनी संख्या बढ़ाने लगता है।


पल भर में हजारों की हो जाती है संख्या

वैज्ञानिकों के अनुसार, कोरोना वायरस में 2000 प्रोटीन होते हैं। लेकिन जब वह मानव कोशिकाओं को अपनी गिरफ्त में लेता है तो हजारों कोशिकाओं को संक्रमित करने लगता है और उन्हें मारने लगता है। फेफड़े सबसे संवेदनशील होते हैं क्योंकि इसमें सबसे अधिक ऐसे प्रोटीन होते हैं जो बाहरी तत्वों जैसे वायरस और बैक्टीरिया को रोकने का काम करते हैं। सार्स से पीड़ित मरीजों में वायरस ने यहीं से अपना कुनबा बढ़ाया था और अब कोविड-19 में भी यही हो रहा है। यही कारण है कि प्रोटीन को बंद रखने वाली दवाओं पर डॉक्टरों का विश्वास अधिक है जिससे वायरस के प्रोटीन को स्वस्थ कोशिकाओं में घुसने से रोका जा सके।

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