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नगरोटा एनकाउंटरः पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के निर्देश पर पुलवामा जैसे हमले की थी योजना, मसूद के भाई रऊफ ने आतंकियों को चुना था

Sun, 22 Nov 2020 03:25 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आतंकी अजहर मसूद - फोटो : पीटीआई
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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के निर्देश पर जम्मू-कश्मीर में पुलवामा जैसा बड़ा हमला करने की साजिश रची गई थी। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मोस्टवांटेड आतंकी मौलाना मसूद अजहर के भाई अब्दुल रऊफ असगर को इस साजिश को अंजाम देने का जिम्मा दिया था, जिसने जैश के ही चार आतंकियों को नापाक मंसूबे को पूरा करने के लिए चुना। इन आतंकियों ने 18-19 नवंबर की दरम्यानी रात सांबा सेक्टर में घुसपैठ की थी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने इन चारों को जम्मू सेक्टर के नगरोटा में हुई मुठभेड़ में मार गिराया।

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सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने नगरोटा मुठभेड़ में यह बड़ा खुलासा किया है। सूत्रों ने बताया कि इन चारों आतंकियों का हैंडलर रऊफ ही था। रऊफ ने भारतीय सीमा के निकट पाकिस्तान में बने जैश के शकरगढ़ कैंप से चार जिहादियों को चुना। रऊफ के साथ ही जैश के एक और आतंकी काजी तरार भी हमले की साजिश में शामिल था।


सूत्रों ने बताया कि बहावलपुर में जैश के मुख्यालय में एक मीटिंग बुलाई गई थी। इस मीटिंग में रऊफ और तरार के अलावा जैश आतंकी नेटवर्क चलाने वाले मौलाना अबू जुंदाल और मुफ्ती तौसीफ और आईएसआई के अफसर भी शामिल हुए। मीटिंग में शुरुआती योजना बनने के बाद जैश की शकरगढ़ इकाई को इस हमले की साजिश को अंजाम देने के लिए तैयारियों का जिम्मा दिया गया। इन तैयारियों में आतंकियों के चुनाव से लेकर उनकी ट्रेनिंग तक शामिल थे।
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जैश के स्थानीय हैंडलर मुहम्मद असगर खान कश्मीरी के भी संपर्क में थे आतंकी
जैसे ही आतंकी भारतीय क्षेत्र में घुसे, वे लगातार रऊफ के संपर्क में बने रहे। इसके अलावा ये आतंकी कश्मीर में हैंडलर मुहम्मद असगर खान कश्मीरी के संपर्क में भी रहे, जो कश्मीर घाटी में हमलों को अंजाम देने के लिए जैश का स्थानीय सरगना था।

आत्मघाती हमले की दी गई थी ट्रेनिंग
सूत्रों के मुताबिक, शकरगढ़ में जैश के ट्रेनिंग कैंप में इन चारों आतंकियों को आत्मघाती हमले की ट्रेनिंग दी गई। इन्हें उपलब्ध विस्फोटकों का इस्तेमाल करके कश्मीर घाटी में ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की भी ट्रेनिंग दी गई।

सीमावर्ती क्षेत्रों में बने नालों का लिया सहारा
जैश के आतंकवादियों ने भारतीय सीमा में सांबा सेक्टर में घुसने के लिए नदी के सीमावर्ती क्षेत्र में नालों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया। चारों ने सांबा से छह किमी दूर जटवाल के पास से एक ट्रक लिया, जो जम्मू के कठुआ जा रहा था। जैश आतंकियों की घुसपैठ अक्सर तड़के 3-4 बजे के बीच होती है।

आतंकियों के सभी हथियार पाकिस्तान में बने हुए, सबके लिए तय किए गए थे समय
नगरोटा में जब सुरक्षा बलों ने ट्रक को रोका, तो इसमें छिपे चारों आतंकियों ने अल्लाह हू अकबर, इस्लाम जिंदाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद और जैश जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू किए। सुरक्षा बलों ने इन्हें सरेंडर करने को कहा, मगर यह साफ था कि वे भारतीय सरजमीं पर जान देने के इरादे से ही आए थे। मारे जाने के बाद से इनके पास से 11 एके-47 राइफल, 23 मैगजीन, 29 ग्रेनेड और 10 अंडर बैरेल ग्रेनेड लॉन्चर मिले। सभी के सभी हथियार पाकिस्तान में बने हुए थे। इनके पास से जीपीएस प्रणाली और कैसियो की घड़ियां भी मिलीं, जिसमें सभी आतंकियों के लिए एक समय तय किया गया था।

पुलवामा में भी था जैश का हाथ 
भारतीय विदेश मंत्रालय ने शनिवार को पाकिस्तानी उच्चायोग के एक वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर फटकार लगाई। बाद में विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, अतीत में भी जैश भारत के खिलाफ हमलों को अंजाम देता रहा है। फरवरी 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले में भी जैश का हाथ था। नगरोटा मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के पास से बड़े पैमाने पर बरामद हथियार और बारूद इस बात की पुष्टि करते हैं कि आतंकी केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा को भंग करना चाहते थे। ये आतंकी खासकर जम्मू-कश्मीर में होने वाले जिला विकास परिषद चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करना चाहते थे।

विदेश मंत्रालय ने कहा, भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू के नगरोटा में 19 नवंबर 2020 को एक बड़े आतंकी हमले के मंसूबे को नाकाम कर दिया। शुरुआती रिपोर्ट में पता चला है कि मुठभेड़ में मारे गए आतंकी पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे। इस आतंकी संगठन के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने पाबंदी लगाई है। भारत सरकार देश में जैश के लगातार आतंकी हमलों को लेकर गंभीर चिंता जाहिर करती है।

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