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क्या है जल्लीकट्टू और तमिलनाडु में क्यों मचा बवाल ?

Fri, 20 Jan 2017 02:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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jallikattu
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तमिलनाडु में इस वक्त जल्लीकट्टू को लेकर के बवाल मचा हुआ है और राज्य में इस खेल को जारी रखने के समर्थन में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। जल्लीकट्टू तमिलनाडु में प्राचीनकाल से चला आ रहा है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस खेल पर रोक लगाए जाने के बाद से इसे दोबारा से शुरू करने के लिए लगातार मांग की जा रही है। 
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400 ईसा पूर्व में शुरू हुआ था यह खेल

इस खेल का नाम दो शब्दों से पड़ा है। तमिल भाषा में 'जल्ली' शब्द सल्ली से आया है जिसका मतलब 'सिक्के' होता है। कट्टू शब्द का अर्थ होता है 'बांधा हुआ'। इस खेल में सांडों के सींग पर लाल कपड़ा बांधा जाता है, जो कि खिलाड़ी को निकालना होता है। सांड को भीड़ में छोड़ दिया जाता है। भीड़ में जो भी व्यक्ति  इस बंधे हुए कपड़े को सांड के सींग निकाल लेता है उसको ईनाम में सिक्के मिलते हैं। 
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समर्थन में आई तमिल फिल्म इंडस्ट्री

रजनीकांत
तमिलनाडु के हर शहर और गांव में इस खेल का आयोजन पोंगल के दिन होता था। इस खेल को तमिलनाडु की जनता अपनी संस्कृति का एक अहम हिस्सा मानती है। दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस खेल पर बैन लगा दिया था। पशुओं के अधिकारों की रक्षा करने के काम करने वाली संस्थाओं ने इस खेल को जानवरों के लिए हानिकारक बताया है।

इस खेल को जारी रखने के समर्थन में तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार भी आ गए हैं। वरिष्ठ अभिनेता कमल हासन और रजनीकांत ने इस खेल का समर्थन करते हुए कहा था कि सांड़ों की लड़ाई का यह खेल तमिल संस्कृति का हिस्सा है। रजनीकांत ने कहा था कि 'चोट से बचने के लिए खेल के नियमन को लेकर नियम बनाए जा सकते हैं लेकिन क्या किसी संस्कृति को अस्वीकार करना सही है?'
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