पाकिस्तान में चरमपंथियों ने इस बार बम धमाके के लिए जिस ठिकाने को निशाना बनाया, वो मशहूर सूफी संत लाल शाहबाज़ कलंदर की दरगाह है। बम धमाके में 70 लोग मारे गए हैं और घायलों की संख्या भी दर्जनों में है। पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से लगातार चरमपंथी हमले हो रहे हैं।
कहते हैं कि सूफी कवि अमीर ख़ुसरो ने बाबा लाल शाहबाज़ कलंदर के सम्मान में ही 'दमादम मस्त कलंदर' का गीत लिखा था। बाद में इस गीत में बाबा बुल्ले शाह ने कुछ बदलाव किए और 'दमादम मस्त कलंदर' के 'झूलेलाल कलंदर' लाल शाहबाज़ कलंदर ही हैं।
इस गीत की लोकप्रियता दुनिया भर में है और इसी बात से पाकिस्तान की इस दरगाह की अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है। माना जाता है लाल शाहबाज़ कलंदर के पुरखे बगदाद से ईरान के मशद आकर बस गए थे और फिर वहां से अफगानिस्तान के मरवांद चले गए जहां 'दमादम मस्त कलंदर' वाले बाबा का जन्म हुआ।
लाल शहबाज कलंदर फ़ारसी ज़ुबान के कवि रूमी के समकालीन थे। उन्होंने इस्लामी दुनिया का सफ़र किया और आखिर में पाकिस्तान के सेहवान आकर बस गए। उन्हें यहीं दफनाया भी गया। कहा जाता है कि 12वीं सदी के आखिर में वे सिंध आ गए थे। उन्होंने सेहवान के मदरसे में पढ़ाया और यहीं पर उन्होंने कई किताबें भी लिखीं।