केंद्र सरकार द्वारा 500 और 1000 रुपये के नोट बैन करने के बाद इस फैसले को लेकर समीक्षा और आरोप प्रत्यारोपों का दौर जारी है। कोई इसे आम जनता की मुसीबत बढ़ाने वाला फैसला बता रहा है तो कोई इसे जनता के लिए राहत देने वाला निर्णय बता रहा है। लेकिन कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो वाकई आम आदमी की जिंदगी पर फर्क डालेंगी। आइए डालते हैं एक निगाह
सस्ती होगी प्रापर्टी
500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने के फैसले का सबसे ज्यादा झटका लगा है रियल एस्टेट सेक्टर को। पहले से ही मंदी की मार से जूझ रहे रियल एस्टेट को इससे और झटका लगा है। रियल एस्टेट सेक्टर को कालाधन खपाने का सबसे ज्यादा बड़ा जरिया माना जाता है।
आमतौर पर अपनी अघोषित आय और कालाधन छुपाने के लिए लोग प्रापर्टी में निवेश करते हैं। बड़े-बड़े बिजनेशमैन और नेता भी अपना पैसा प्रापर्टी में ही खपाते हैं। धन की लगातार आवाजाही के कारण प्रापर्टी की कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन अब पुराने नोट बंद होने के कारण यह संभव नहीं हो पाएगा। प्रापर्टी में सिर्फ वही लोग पैसा लगा पाएंगे जो सफेद धन का इस्तेमाल करते हैं।
इसका नतीजा यह होगा कि अवैध धन की आवाजाही रुकेगी और प्रापर्टी के दाम स्थिर होंगे। विशेषज्ञों की मानें तो लेनदेन कम होता है तो प्रापर्टी की कीमतें नीचें भी आ सकती हैं। जिसका सीधा फायदा आम आदमी को होगा।
सस्ती हो सकती है शिक्षा
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नोट बैन का एक फायदा यह भी होगा कि शिक्षा का लगातार हो रहा बाजारीकरण रुकेगा। पिछले कुछ समय में रियल एस्टेट के साथ जिस सेक्टर ने सबसे ज्यादा तरक्की की है वो शिक्षा का क्षेत्र ही है। पिछले एक दशक में नए नए स्कूल कालेज और विश्वविद्यालयों की बाढ़ सी आ गई है। शिक्षा के क्षेत्र में निजी खिलाड़ियों के आ जाने के कारण शिक्षा लगातार महंगी ही हुई है चाहे वो व्यावसायिक हो या पारंपरिक।
माना जाता है कि नए नए स्कूल कालेज खुलने में भी काफी मात्रा में कालेधन का इस्तेमाल किया गया है। बड़े बड़े सफेदपोशों ने अपनी काली कमाई शिक्षा के क्षेत्र में लगाकर उसे एक नंबर का कर दिया था। वहीं पैसे वाले लोग भी अपने दो नंबर के पैसे को बच्चों के एडमिशन में बेखौफ इस्तेमाल करते थे।
लेकिन अब अचानक नोट पर बैन लगने से न काली कमाई बाहर आ पाएगी न एडमिशन को लेकर वह मारामारी मचनी है। नतीजतन शिक्षा आम आदमी के लिए सुलभ हो सकती है।
घट सकती हैं सोने की कीमतें
सोना खरीदने में भी लोग कालाधन का काफी इस्तेमाल करते हैं। सोने में निवेश से उनका कालाधन आसानी से सफेद बन जाता है। यही कारण है कि पिछले कुछ समय से सोने में निवेश करने वालों की संख्या अचानक बढ़ी है। इसकी वजह से सोने की कीमतें भी लगातार तीस हजार के आसपास बनी हुई हैं। लेकिन अब पुराने नोटों पर रोक लगने से कालाधन भी जहां का तहां फंस जाएगा नतीजतन सोने में निवेश की रफ्तार भी घटेगी। निवेश घटने का असर उसकी मांग पर भी बढ़ेगा जिसके चलते उसकी कीमतें निश्चित रूप से नीचे आएंगी।
रुकेगी कालाजाबारी
बड़े नोटों पर बैन लगने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे कालाबाजारी पर भी लगाम लगेगी। सरकार की निगाह से छुपाकर लोग बाजार की बड़े बड़े खिलाड़ी चीजों की कालाबारी में लगे रहते हैं। इसके लिए सबसे ज्यादा कालाधन का ही इस्तेमाल होता है। लेकिन अब बाजार से पुरानी मुद्रा हटाकर नई मुद्रा आने से चीजों की कालाबाजारी संभव नहीं हो पाएगी।
क्योंकि न लोगों के पास एक साथ इतना धन होगा कि वो चीजों को इकट्ठा खरीदकर उसकी कालाबाजारी कर सकें न वो फिलहाल इतना रिस्क उठाने की स्थिति में रहेंगे। बाजार में कालाबाजारी रुकने का सीधा फायदा आम आदमी को ही होगा क्योंकि इससे घरेलू उपयोग और खाद्य पदार्थों की कीमतें नीचें आ सकती हैं।