न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 30 Jul 2019 10:23 PM IST
तीन तलाक विधेयक मंगलवार को राज्यसभा में भी पास हो गया। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा में बीती 25 जुलाई को पारित हो चुका है। राज्यसभा में तीन तलाक विधेयक पर करीब चार घंटे चली बहस के बाद यह पारित हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2017 में तीन तलाक को गैर-कानूनी करार दिया था। तीन तलाक विधेयक लोकसभा में तीन बार पारित हुआ, लेकिन यह दो बार राज्यसभा में अटक गया। केंद्र सरकार ने तीसरी बार इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया जहां इसे पास कराने में कामयाबी मिली। राष्ट्रपति की सहमति के बाद तीन तलाक का विधयेक कानून बन जाएगा।
क्या हैं तीन तलाक विधेयक के प्रावधान
- तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक देना गैर कानूनी
- तीन तलाक संज्ञेय अपराध मानने का प्रावधान, यानी पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन तब जब महिला खुद शिकायत करेगी
- खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार
- पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं कर सकता है
- मौखिक, लिखित, इलेक्ट्रॉनिक (एसएमएस, ईमेल, वॉट्सऐप) पर तलाक को अमान्य करार दिया गया
- आरोपी पति को तीन साल तक की सजा का प्रावधान
- मजिस्ट्रेट आरोपी को जमानत दे सकता है
- आरोपी को जमानत तभी दी मिलेगी, जब पीड़ित महिला का पक्ष सुना जाएगा
- पीड़ित महिला के अनुरोध पर मजिस्ट्रेट समझौते की अनुमति दे सकता है
- पीड़ित महिला पति से गुजारा भत्ते का दावा कर सकती है
- महिला को कितनी रकम दी जाए यह जज तय करेंगे
- पीड़ित महिला के नाबालिग बच्चे किसके पास रहेंगे इसका फैसला भी मजिस्ट्रेट ही करेगा
सुप्रीम कोर्ट ने घोषित किया था असंवैधानिक
बता दें कि सायरा बानो केस पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने 2017 में तीन तलाक को गैर-कानूनी करार दिया था। अलग-अलग धर्मों वाले 5 जजों की बेंच ने 3-2 से फैसला सुनाते हुए सरकार से तीन तलाक पर छह महीने के अंदर कानून लाने को कहा था। दो जजों ने इसे असंवैधानिक कहा था, एक जज ने पाप बताया था। इसके बाद दो जजों ने इस पर संसद को कानून बनाने को कहा था।
कब क्या हुआ
संसद में यह बिल लोकसभा से तीन बार पास हुआ, लेकिन राज्यसभा में अटक गया था। इसके बाद इसे कानूनी जामा पहनाने के लिए सरकार ने अध्यादेश का रास्ता चुना है। हालांकि 6 महीने के अंदर इस पर संसद की मुहर लगनी जरूरी थी।
सरकार कब-कब लाई अध्यादेश
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद इसका इस्तेमाल होने पर सरकार सितंबर 2018 में अध्यादेश लाई। तीन तलाक देने पर पति को तीन साल की सजा का प्रावधान रखा गया। हालांकि, किसी संभावित दुरुपयोग को देखते हुए विधेयक में अगस्त 2018 में संशोधन कर दिए गए थे।
जनवरी 2019 में इस अध्यादेश की अवधि पूरी होने से पहले दिसंबर 2018 में एक बार फिर सरकार बिल को लोकसभा में नए सिरे से पेश करने पहुंची। 17, दिसंबर 2018 को लोकसभा में बिल पेश किया गया। हालांकि, एक बार फिर विपक्ष ने राज्यसभा में इसे पेश नहीं होने दिया और बिल को सिलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग की जाने लगी। एक बार फिर बिल अटक गया।
तीन तलाक पर 20 देशों में है प्रतिबंध
तीन तलाक को कई मुस्लिम देशों ने बैन कर रखा है। इन देशों का जिक्र सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक पर बने पैनल ने भी किया था। पैनल ने ताहिर महमूद और सैफ महमूद की किताब मुस्लिम लॉ इन इंडिया का जिक्र किया। इसमें अरब के देशों में तीन तलाक को समाप्त किए जाने की बात कही है।
- अल्जीरिया
- मिस्र
- इराक
- जॉर्डन
- कुवैत
- लेबनान
- लीबिया
- मोरक्को
- सूडान
- सीरिया
- ट्यूनीशिया
- संयुक्त अरब अमीरात
- यमन
इसके अलावा
इंडोनेशिया, मलेशिया और
फिलीपींस जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देश तलाक के लिए सख्त कानून रखते हैं।
क्या है तीन तलाक?
तीन तलाक का जिक्र न तो कुरान में कहीं आया है और न ही हदीस में। यानी तीन तलाक इस्लाम का मूल भाग नहीं है। तीन तलाक से पीड़ित कोई महिला उच्च अदालत पहुंची है तो अदालत ने कुरान और हदीस की रौशनी में ट्रिपल तलाक को गैर इस्लामिक कहा है। तीन बार तलाक को 'तलाक-ए-बिद्दत' कहा जाता है। बिद्दत यानी वह कार्य या प्रक्रिया जिसे इस्लाम का मूल अंग समझकर सदियों से अपनाया जा रहा है, हालांकि कुरान और हदीस की रौशनी में यह कार्य या प्रक्रिया साबित नहीं होते।