नागरिकता संशोधन बिल के विरोध की आग अब मशहूर गायक भूपेन हजारिका को मरणोपरांत मिले देश से सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न तक पहुंच गई है। भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने पिता को मिले इस सर्वोच्च सम्मान को लेने से मना कर दिया है। वहीं दूसरी ओर हजारिका के भाई समर हजारिका और भाभी मनीषा का कहना है कि भारत रत्न का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। बता दें केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को भूपेन हजारिका, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और समाजसेवी नानाजी देशमुख को इस साल का भारत रत्न अवार्ड देने की घोषणा की थी।
देश के पूर्वोत्तर राज्यों में इस बिल का काफी विरोध हो रहा है। वहीं सरकार राज्यसभा में इस बिल को पास कराने लिए प्रतिबद्ध है। ये बिल लोकसभा में 8 जनवरी को पास कराया गया था। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने नागरिकता संशोधन बिल मंगलवार को राज्यसभा में पेश किया।
असमिया गायक भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया है कि कई पत्रकार मुझसे पूछ रहे हैं कि मैं अपने पिता को दिए गए भारत रत्न को स्वीकार करूंगा या नहीं? लेकिन अभी तक केंद्र सरकार की तरफ से न्योता नहीं मिला है तो भारत रत्न लौटाने का सवाल ही नहीं उठता।
बता दें कि इससे पहले रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भूपेन हजारिका के बेटे तेज ने नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में पिता को मिलने वाले भारत रत्न अवार्ड को लेने से मना कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस सम्मान को देने में जिस तरह की जल्दबाजी दिखाई है और जो समय चुना है वह और कुछ नहीं केवल लोकप्रियता का फायदा उठाने का रास्ता है।
आपके लिए- इस बिल के लागू होने से पूर्वोत्तर जैसे राज्यों की जनसंख्या कई गुना बढ़ जाएगी। वहां के लोगों का विरोध इसलिए भी ठीक है क्योंकि बेशक गैर मुस्लिम उन्हीं के धर्म वाले हैं लेकिन इनके रहने का तौर तरीका मुस्लिम देशों जैसा ही है।
उन्होंने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि सरकार ने सम्मान देने के लिए जो समय चुना है वह कई सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में जब नागरिकता बिल के विरोध में पूर्वोत्तर के लोग सड़कों पर हैं तो उनके हीरो को भारत रत्न देना बड़े सवाल खड़े करता है।
जानकारी के लिए बता दें इस बिल के विरोध में मणिपुर के मशहूर फिल्म निर्माता अरिबाम श्याम शर्मा ने भी 3 फरवरी को बिल के विरोध में पद्मश्री वापस लौटाने का ऐलान किया है। उन्हें साल 2006 में ये पुरस्कार मिला था। 83 वर्षीय फिल्म निर्माता और म्यूजिक कंपोजर अरिबाम की कई फिल्मों को नेशनल फिल्म अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
नागरिकता संशोधन बिल के तहत 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आ चुके लोगों को ही 11 साल के बजाय 6 साल तक देश में रहने पर नागरिकता दी जाएगी। ऐसे में बांग्लादेशियों की ज्यादा संख्या को इसका लाभ होने की बात मानी ही नहीं जा सकती। इस बिल के माध्यम से सरकार अवैध घुसपैठियों की परिभाषा की फिर से व्याख्या करना चाहती है।
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए 31 हजार प्रवासियों को संशोधित नागरिकता विधेयक से तुरंत लाभ मिलेगा। ये वो लोग हैं, जो इन तीन देशों के अल्पसंख्यक हैं और भारत में धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए रह रहे हैं। ये लोग भारत में लॉन्ग टर्म वीजा पर रह रहे हैं और भारत की नागरिकता पाने के लिए आवेदन कर चुके हैं।
जेपीसी रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया विभाग ने समिति के समक्ष अपने बयान में कहा है कि तीन देशों से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत में आकर बसे 31,313 प्रवासियों को नागरिकता बिल में हुए संशोधन से तुरंत लाभ मिलेगा। हालांकि विभाग ने ये भी कहा कि जो लोग इस बात का दावा नहीं कर पाए कि वह भारत में धार्मिक उत्पीड़न के कारण बसे हैं, उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
आईबी डायरेक्टर ने पैनल से कहा था कि, "भविष्य में किए गए किसी भी दावे की जांच की जाएगी, रॉ के माध्यम से भी, कोई भी फैसला (नागरिकता देना) लेने से पहले जांच होगी।" इसके साथ ही उन्होंने इशारा करते हुए बताया कि 31,313 प्रवासियों (जो लॉन्ग टर्म वीजा पर रहे हैं) की जांच दोबारा भी की जा सकती है।
आपके लिए- इस बिल के लागू होने से पूर्वोत्तर जैसे राज्यों की जनसंख्या कई गुना बढ़ जाएगी। वहां के लोगों का विरोध इसलिए भी ठीक है क्योंकि बेशक गैर मुस्लिम उन्हीं के धर्म वाले हैं लेकिन इनके रहने का तौर तरीका मुस्लिम देशों जैसा ही है।
आपके लिए- आबादी बढ़ने से राज्यों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इन लोगों के रहने के लिए जगह की व्यवस्था तो एक मुद्दा होगा ही, साथ ही इनके लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का खर्चा भी बढ़ेगा। जिससे सरकार पर अधिक बोझ आ जाएगा। माना जा रहा है कि बिल के पास होने के बाद बड़ी संख्या में प्रवासियों को नागरिकता मिल जाएगी।