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इतिहास में दर्ज ऐसी घटनाएं, जिनका शिकार बने स्कूली बच्चे

Wed, 06 Jun 2018 04:44 PM IST
डिजिटल डेस्क, अमर उजाला
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स्कूलों में होने वाली कोई भी अप्रिय घटना लोगों को झकझोर कर रख देती है। चाहे फिर वो मामला किसी छात्र की हत्या का हो या स्कूल में हुए आतंकी हमले का। नन्हे नन्हे बच्चों की जान को यदि कोई भी नुकसान होता है तो उसका असर उनके परिवार तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी दुनिया उसका शोक मनाती है। आज हम स्कूलों में हुई ऐसी ही बड़ी त्रासदियों के बारे में आपको बताने वाले हैं-
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रूस- बेसलान स्कूल सीज

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साल 2004 में बेसलान के स्कूल में बहुत बड़ा हमला हुआ था। इस हमले से पूरी दुनिया भयभीत हो गई थी। यहां चेचन्या के 32 आतंकियों ने तीन दिनों तक स्कूल को घेरे रखा। इस घटना में 330 से ज्यादा लोग मारे गए जिसमें ज्यादातर बच्चे थे। आतंकियों ने स्कूल के पहले दिन के आयोजन समारोह में आए 1200 शिक्षकों, छात्रों और अभिभावाकों को बंदी बनाकर रखा।
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नाइजीरिया- चिबुक स्कूल की लड़कियों का अपहरण

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साल 2014 में आतंकवादी इस्लामिक समूह बोको हराम ने नाइजीरिया के चिबुक से 276 लड़कियों का अपहरण कर लिया था। इसके बाद 100 के करीब लड़कियों को कैदियों की अदला बदली के बाद वापिस लाया गया। वहीं बाकी लड़कियां अभी भी उन्हीं के कब्जे में हैं। 

पाकिस्तान- पेशावर हमला

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साल 2014 में ग्रेनेड और स्वचालित राइफलों के साथ आए सशस्त्र आतंकियों ने पाकिस्तान के पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला कर दिया। इस बड़े आतंकी हमले में कुल 150 लोगों की मौत हो गई जिसमें 134 छात्र थे। 
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केन्या- गरीसा यूनिवर्सिटी कॉलेज अटैक

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साल 2015 में अल कायदा से जुड़े इस्लामिक आतंकवादी समूह अल-शबाब ने यहां गोलियों से हमला किया। इसमें 147 लोगों की मौत हो गई जबकि 79 लोग जख्मी हो गए। जांच में पता चला कि हमलावर ईसाइयों को अपना शिकार बना रहा था और मुस्लिमों को वहां से जाने दे रहा था।
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केन्या- क्यांगुली फायर त्रासदी

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केन्या के क्यांगुली सेकेंड्री स्कूल में ये घटना साल 2001 में हुई। इस दौरान जान बचा पाने में जो लोग सफल हुए उन्होंने बताया कि छात्रावास के दरवाजे बाहर से बंद कर दिए गए थे। ताकि अंदर मौजूद 200 छात्र जलकर मर जाएं। इस आगजनी में 62 छात्रों की मौत हुई, 21 घायल हुए और 70 बच गए। बाद में हत्या का आरोप दो छात्रों पर लगाया गया। 
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थाईलैंड- थामासत यूनिवर्ससिटी नरसंहार

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साल 1976 में थाई सरकार ने 46-100 छात्र कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया। कारण था छात्रों द्वारा पूर्व तानाशाह का विरोध करना। बाद में निशस्त्र छात्रों के साथ सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने मारपीट और रेप किया। कई छात्रों की तो हत्या भी की गई थी। 

अमेरिका- वर्जीनिया टेक शूटिंग

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वर्जीनिया के टेक ब्लैक्सबर्ग कैंपस में साल 2007 में एक सीनियर छात्र ने 2 बंदूक और 400 राउंड गोला बारूद की सहायता से 32 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना में कई छात्र घायल भी हुए। बाद में पता चला कि हमलावर मानसिक रूप से बीमार था और आखिर में उसने खुद को भी गोली मार ली। जिसके बाद उसकी भी मौत हो गई।

अमेरिका- सैंडी हुक एलीमेंट्री स्कूल

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इस हमले के पीड़ितों की उम्र 6-7 साल के बीच थी। साल 2012 में हुए इस हमले में 20 साल के हमलावर ने पहले अपनी मां को गोली मारी और बाद में 20 स्कूली बच्चों और 6 व्यस्क स्कूली स्टाफ को मौत के घाट उतार दिया। आखिर में उसने खुद को भी गोली मार ली।

पाकिस्तान- बाचा खान यूनिवर्सिटी हमला 

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पेशावर हमले के 14 महीने बाद ये हमला हुआ। करीब 4 आतंकी सुबह के कोहरे में बाचा खान यूनिवर्सिटी में घुस गए और 30 लोगों की जान ले ली। इस हमले में दर्जनों लोग भी  घायल हुए। हालांकि बाद में तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। 

अमेरिका- टेक्सास टावर शूटिंग

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साल 1966 में एक व्यक्ति ने यूनिवर्सिटी के क्लॉक टावर से लोगों की तरफ गोलियां दागीं। इस हमले में 14 लोगों की मौत हो गई और 31 लोग घायल हो गए। हमलावर ने इससे पहले अपनी मां और बहन की भी हत्या कर दी थी ताकि उसकी करतूतों से उन्हें कोई शर्मिंदगी ना झेलनी पड़े। यह पहली ऐसी घटना थी जिसे 90 मिनट तक मीडिया में लाइव दिखाया गया था।

स्कॉटलैंड- डनब्लेन स्कूल नरसंहार

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स्कॉटलैंड के डनब्लेन में एक प्राइमरी स्कूल में बंदूकधारी ने हमला कर दिया था। इस हमले में 16 छात्र और शिक्षक मारे गए। आरोपी ने स्कूल के टेलीफोन की केबल भी काट दी थी। उसने लगातार पांच मिनट तक गोलियां चलाई थीं।

अमेरिका- मार्जरी स्टोनमैन डगलस हाई स्कूल शूटिंग

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फरवरी 2018 में हुए इस हमले में कुल 14 छात्रों, 3 स्टाफ मेंबर की मौत हो गई थी। साथ ही 17 लोग भी घायल हुए। बाद में पता चला कि हमला करने वाला कोई और नहीं बल्कि स्कूल का ही एक पूर्व छात्र था।
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जर्मनी- इर्फट स्कूल हमला

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स्कूल से निष्कासित छात्र ने साल 2002 में इस हमले को अंजाम दिया था। उसने अपनी जान लेने से पहले स्कूल के छात्रों और शिक्षकों पर गोली चला दी, जिसमें कुल 17 लोगों की मौत हो गई।
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