कोरोना के कारण डेढ़ साल से घरों में कैद बच्चों की मनोस्थिति को लेकर अभिभावकों को सतर्क रहना होगा। बच्चों की मनोस्थिति को समझने के लिए उनसे बात करें। बच्चों के मन में जो कुछ भी चल रहा है उसके बारे में जानें, तभी बच्चे महामारी के इस कठिन दौर में मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेंगे।
महामारी के कारण बच्चों का स्कूल बंद है। वे सीमित दायरे में रहकर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। बहुत से बच्चे ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने माता-पिता, दादा-दादी या किसी अपने बहुत करीबी को खो दिया है जिनसे वे बहुत घुले मिले थे।
बच्चों के मन पर इन सबका क्या प्रभाव पड़ रहा है इसके बारे में जानना जरूरी है। बच्चों के मन मस्तिष्क पर क्या गुजर रही है। वे क्या सोच रहे हैं और क्या चाहते हैं इसका पूरा विवरण अभिभावकों के पास होना चाहिए। बच्चों की समस्याओं का सामधान करें। उन्हें समझाएं कि ये दौर खत्म हो जाएगा और सब कुछ सामान्य हो जाएगा।
बचपन के पहले पांच साल अहम...
डॉ. राजेश सागर बताते हैं कि बच्चों के जीवन का पहले पांच साल अहम होते हैं। ये वो दौर होता है जब वो वातावरण में घुल मिल रहे होते हैं। नए लोगों से मिलते-जुलते हैं, नई-नई जगह जाते हैं तो चीजों को समझते और देखते हैं।
महामारी के कारण ये प्रक्त्रिस्या ठहर सी गई है। इस कारण बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे कठिन दौर में बच्चों का जीवन सामान्य रहे इसकी पूरी कोशिश करनी होगी।
बच्चे को बताएं वे अकेला नहीं है
डॉ. सागर कहते हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई भी एक्टिविटी पर आधारित होनी चाहिए। इससे पढ़ाई रोचक होगी और बच्चे चीजों को आसानी से सीखेंगे। बच्चों को हमेशा ये अहसास कराते रहें कि वे महामारी के इस दौर में अकेले नहीं है। कोशिश करें कि बच्चे अपने दोस्तों के साथ वीडियो कॉल या कॉल के जरिए मिलें और बात करें। उन्हें उनका वक्त दीजिए जिससे वे खुद को दूसरे के समक्ष स्पष्ट कर सकें।