भारतीय सेना के जवान। (फाइल फोटो)
सबसे पहले इंडियन आर्मी की बात करते हैं. अलग-अलग रेजिमेंट्स से परे आर्मी का नारा है 'भारत माता की जय'. और इंडियन आर्मी का मोटो है- सर्विस बिफोर सेल्फ (खुद से पहले सेवा के बारे में सोचना)।
पैराशूट रेजीमेंट के जवान (फाइल फोटो)।
इस रेजीमेंट की स्थापना आज़ादी से पहले 29 अक्टूबर 1941 को हुई थी। कारगिल युद्ध में पैराशूट बटालियन 6 और 7 ने मुश्कोह घाटी को फतेह किया, वहीं पैराशूट बटालिन 5 ने बाटालिक प्वाइंट पर फतेह हासिल की।
भारत-पाकिस्तान युद्ध, 1965 के बाद भारतीय सेना को मैकेनाइज्ड इंफ्रेंटी रेजीमेंट की शिद्दत से ज़रूरत महसूस हुई। उसके बाद लंबे समय तक चली प्रक्रिया के फलस्वरूप 1979 में मैकेनाइज्ड इंफ्रेंटी रेजीमेंट की स्थापना हुई।
पंजाब रेजीमेंट के जवान।
पंजाब रेजिमेंट: विजय मंत्र- स्थल वा जल और नारा- बोले सो निहाल, सत श्री अकाल
पंजाब रेजीमेंट भारत के सबसे पुराने फौजी रेजीमेंट में से है। भारत-पाक बंटवारे के समय पंजाब रेजीमेंट का भी बंटवारा हुआ। जिसका पहला हिस्सा पाकिस्तान को मिला, तो दूसरी बटालियन भारत को। 'लोगेंवाला' की लड़ाई में पंजाब रेजीमेंट का जौहर हम सभी देख चुके हैं, जिसने पाकिस्तानी सेना को धूल चटा दी। हालांकि ऑपरेशन 'ब्लूस्टार' के समय बगावत की वजह से 122 अधिकारियों के कोर्टमार्शल होने जैसीभारतीय सेना के इतिहास की सबसे बड़ी घटना भी पंजाब रेजीमेंट में हुई।
बिहार रेजिमेंट - विजय मंत्र- 'कर्म ही धर्म है' और नारा- जय बजरंग बली/ बिरसा मुंडा की जय।
बिहार रेजीमेंट की स्थापना 1941 में हुई थी। बिहार रेजीमेंट ने आजादी से पहले बर्मा युद्ध और द्वितीय विश्वयुद्ध में हिस्सा लिया था। वहीं आज़ादी के बाद इस रेजीमेंट ने भारत-पाक के सभी युद्धों में हिस्सा लिया। बिहार रेजीमेंट ने कारगिल युद्ध में भी दुश्मनों के दांत खट्टे किए।
राजपुताना रेजिमेंट: विजय मंत्र- सर्वत्र विजय और नारा- बोल बजरंग बली की जय
सन 1778 में अंग्रेजों ने राजपूत रेजीमेंट को बनाया था। तमाम सैन्य पुरस्कार राजपूत रेजीमेंट के नाम हैं। राजपूत रेजीमेंट ने दोनों विश्वयुद्धों में अंग्रेजों के लिए जौहर दिखाया, तो भारत-पाक बंटवारे के तुरंत बाद पाकिस्तान से लोहा लिया। भारत-चीन युद्ध में भी राजपूत रेजीमेंट ने अदम्य साहस का परिचय दिया था। वहीं 1965 भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान को नाकों चने चबवा दिए। 1971 में पाकिस्तानी सैनिक राजपूत रेजीमेंट के नाम से भय खाते थे, तो कारगिल युद्ध के समय राजपूत रेजीमेंट ने'तोलोइंग' जैसे सबसे महत्वपूर्ण प्वाइंट पर कब्ज़ा किया।
- कुमाऊं रेजिमेंट: विजय मंत्र- पराक्रमो विजयते और नारा- कालका माता की जय, बजरंग बली की जय, दादा किशन की जय
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- गृहवाली रेजिमेंट: विजय मंत्र- युद्ध कृत निश्चय और नारा- बदरी विशाल की जय
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- डोग्रा रेजिमेंट: विजय मंत्र- कर्तव्यं अन्वात्मा और नारा- ज्वाला माता की जय
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- सिख रेजिमेंट: विजय मंत्र- निश्चय कर अपनी जीत करूं और नारा- बोले सो निहाल सत श्री अकाल
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- राजपुताना राइफल्स: विजय मंत्र- वीर भोग्ये वसुंधरा और नारा- राम चंद्र जी की जय
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- सिख लाइट इन्फेंट्री : विजय मंत्र- देग तेग फतेह और नारा- बोले सो निहाल, सत श्री अकाल
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- जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स: विजय मंत्र- प्रस्त रणवीरता और नारा- दुर्गा माता की जय
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- जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फेंट्री: विजय मंत्र- बलिदानम वीर लक्षणम और नारा- दुर्गा माता की जय
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- लद्दाख स्काउट : नारा- की की सो सो लार्घ्यालो ("Ki ki so so Lhargyalo")
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- गोर्खा रेजिमेंट: विजय मंत्र- कायर हुनु भांडा मारनू रामरो और नारा- आयो गोर्खाली
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- 11 गोरखा राइफल्स: विजय मंत्र- कायर हुनु भांडा मारनू रामरो (गोरखा राइफल्स 3, 5, 8, 9 का भी यही मोटो है) और नारा- जय महाकाली
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- मराठा रेजिमेंट: विजय मंत्र- यश सिद्धी और नारा- हर-हर महादेव/ छत्रपति शिवाजी की जय
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- असम रेजिमेंट: विजय मंत्र- असम विक्रम और नारा- राइनो चार्ज
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- जाट रेजिमेंट: विजय मंत्र- संगठन वा वीरता और नारा- जाट बलवाल, जय भगवान
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- मद्रास रेजिमेंट: विजय मंत्र- सर्वधर्मे निधानम श्रेय और नारा- वीर मद्रासी, अडी कोलू, आडी कोलू
इसके अलावा भी कई रेजिमेंट्स हैं जिनमें भारत माता की जय, हर-हर महादेव आदि नारे लगाए जाते हैं। कुल मिलाकर इंडियन आर्मी में यहां की संस्कृति की झलक मिलती है।