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ये है वो मामला जिसने खत्म कर दिया शशिकला का राजनीतिक करियर

Wed, 15 Feb 2017 10:15 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री चुनी गईं शशिकला नटराजन को झटका देते हुए आय से अधिक संपत्ति के मामले में चार साल जेल की सजा और दस करोड़ जुर्माने के फैसले को बरकरार रखा है। शशिकला और तमिलनाडु की दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता सहित चार लोगों के खिलाफ यह सजा तमिलनाडु की स्पेशल कोर्ट ने सुनाई थी जिसे बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट ने बदल दिया था।
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मामले में कर्नाटक सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी जिसकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह एतिहासिक निर्णय सुनाया। इसके साथ ही शशिकला के राजनीतिक कॅरियर पर भी ग्रहण लग गया है जो तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोए बैठी थी।

कोर्ट के निर्णय के बाद वो अगले छह साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकती। इसके अलावा उन्हें साढ़े तीन साल की सजा जेल में काटनी होगी। हालांकि कोर्ट ने उनकी चार साल की सजा को बरकरार रखा है लेकिन पूर्व में वह इसी मामले में छह महीने जेल में काट चुकी हैं ऐसे में उस अवधि को दी गई सजा में से कम कर दिया जाएगा। आइए हम आपको बताते हैं वो पूरा मामला जिसने खत्म कर दिया एआईएडीएमके की सबसे बड़ी नेता का राजनीतिक कॅरियर। 
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यह था मामला, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

सुप्रीम कोर्ट
साल 1991-1996 के दौरान तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहने के दौरान जयललिता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने का केस चला था। जनता पार्टी के नेता सुब्रमणयम स्वामी ने जयललिता उनकी सहयोगी रही शशिकला, उनके भतीजे सुधाकरण सहित एक अन्य रिश्तेदार को आरोपी बनाते हुए कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी।

स्वामी ने जयललिता और उनके सहयोगियों पर 66 करोड़ रुपये की संपति अर्जित करने के आरोप लगाए ‌थे। लंबे समय तक चले मामले में जयललिता और शशिकला को कई महीनों तक जेल की हवा खानी पड़ी थी। द्रमुक महासचिव के अनबझगम ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले को कर्नाटक स्थानांतरित करने की मांग की। उनका दलील थी कि जयललिता के मुख्यमंत्री रहते तमिलनाडु में इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 18 नवंबर 2003 को मामले को बेंगलुरु ट्रांसफर कर दिया।

जिसके बाद मामला बंगलुरू की स्पेशल कोर्ट में पहुंचा तो उसने सितंबर 2014 में जयललिता, शशिकला और दो अन्य रिश्तेदारों को चार साल की कैद और 100 करोड़ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

मामले में शशिकला को साजिश रचने का आरोपी बनाया गया था। जिसके बाद जयललिता को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर अन्य आरोपियों के साथ जेल जाना पड़ा था। इस निर्णय के खिलाफ जयललिता ने कर्नाटक हाइकोर्ट में अपील की।

जहां मई 2015 में हाइकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए जयललिता और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने मामले में सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ अपील की थी। कर्नाटक सरकार की दलील थी कि हाइकोर्ट का फैसला पूरी तरह गलत है, उसने इसे मैथमेटिकल एरर करा दिया था। उसी अपील पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुना दिया।
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