भारत में बुधवार तक कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप में नए म्यूटेशन वाले वायरस के 40 नए मामले मिले। यह नया स्वरूप डेल्टा प्लस कहा जा रहा है, जिसमें के417एन म्यूटेशन है। इससे बचाव के लिए राज्यों को संक्रमितों की जांच और टीकाकरण बढ़ाने की सिफारिश की गई है। जानिए डेल्टा प्लस वेरिएंट के विभिन्न पहलुओं को...
अधिक संक्रामक होने की आशंका
वायरस के डेल्टा स्वरूप में म्यूटेशन से बने नए स्वरूप को डेल्टा प्लस कहा जा रहा है। इसके बारे में सबसे पहले 11 जून को इंग्लैंड के पब्लिक हेल्थ बुलेटिन में बताया गया। यह भारत में पहले मिले डेल्टा स्वरूप के उपवंश का माना जा रहा है। इसमें के417एन नामक स्पाइक प्रोटीन का म्यूटेशन है। यह म्यूटेशन दक्षिण अफ्रीका में मिले वायरस के बीटा स्वरूप में मिला था।
अब तक इन देशों में मिला
पिछले हफ्ते तक डेल्टा प्लस के 190 मामले सामने आ चुके थे। इनमें से ब्रिटेन में 36, जापान में 15, नेपाल में 3, पोलैंड में 9, पुर्तगाल में 22, स्विट्जरलैंड में 18 और अमेरिका में 83 मामले थे। भारत में अब तक 40 मामलों की पुष्टि हुई है, जो महाराष्ट्र, केरल और मध्य प्रदेश में हैं। देश में डेल्टा प्लस का पहला मामला 5 अप्रैल को लिए सैंपल में था।
वहीं ब्रिटेन में 26 अप्रैल को लिए 5 सैंपलों में इनकी पुष्टि हुई। यह सैंपल नेपाल और तुर्की से लौटे नागरिकों के संपर्क में आए लोगों के थे।
अभी राहत : एक भी मौत नहीं
डेल्टा प्लस के कम ही मामले अभी सामने आए हैं, इसलिए बहुत पुख्ता तौर से मृत्युदर का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। अब तक एक की भी मौत इस स्वरूप से होने की पुष्टि नहीं हुई है।
चिंताएं : टीकाकरण का प्रभाव जांचना बाकी
महामारी में टीकाकरण को प्रमुख अस्त्र के तौर पर देखा जा रहा है। डेल्टा प्लस वेरिएंट से बचाव में टीके कितने प्रभावी हैं, इस पर भारत सहित विश्व के कई देशों में अध्ययन हो रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे डेल्टा वेरिएंट की श्रेणी में रख जांच करने की बात कहते हुए इसे असामान्य और चिंताजनक बताया।
भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार जिन राज्यों में यह मिला, वहां ज्यादा जांच, निगरानी व कांटेक्ट ट्रेसिंग की जरूरत है। बड़ी संख्या में टीकाकरण की सिफारिश भी की गई है।
नई लहर की आशंका
वायरस का नया स्वरूप भारत में महामारी की नई लहर ला सकता है, ऐसी भी आशंका जताई गई है। हालांकि डेल्टा प्लस अभी तेजी से बढ़ता नजर नहीं आया है। वहीं आईसीएमआर के वैज्ञानिक तरुण भटनागर के अनुसार तीसरी लहर की वजह केवल वायरस का नया स्वरूप नहीं, बल्कि को लोगों द्वारा बचाव में बरती लापरवाही बन सकती है।