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आम नहीं, खास हैं 'गुजरात के गधे', यूपीए ने दिया था पुरस्कार

Tue, 21 Feb 2017 09:50 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : wikipedia
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पिछले दो दिनों से गुजरात के गधे चर्चाओं के केंद्र में बने हुए हैं। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री मोदी पर वार करने के लिए अपने भाषण में इन खास गधों को निशाना क्या बनाया एकाएक गुजरात के कच्छ से निकलकर यह दुर्लभ जानवर देश की राजनीति के केंद्र में आ गया।
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अब इन गधों (माफ कीजिएगा इन्हें गधा नहीं, घुडखर या वाइल्‍ड एस कहा जाता है) को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। अखिलेश ने अपने बयान में जिस बेतकल्लुफी से इन जानवरों का जिक्र किया असल में ये उतने आम नहीं हैं। 

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुर्लभ प्रजाति का यह जानवर फिलहाल दुनियाभर में गुजरात के कच्छ के जंगलों में ही पाया जाता है वहां भी इनकी संख्या फिलहाल 4800 के करीब है। सरकार ने भी इस जानवर को पशु संरक्षण कानून के तहत शेड्यूल 1 श्रेणी के जानवरों में रखा है, जिनकी संख्या अब बहुत कम बची है।
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गुजरात में पांच हजार वर्ग किमी क्षेत्र इन घुड़खरों के लिए संरक्षित

- फोटो : wikipedia
गुजरात सरकार ने इस जानवर को संरक्षित रखने के लिए कच्छ और उसके आसपास के पांच हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को वाइल्ड एस सेंचुरी के रूप में संरक्षित किया है। लेकिन शायद भाषण देते वक्त अखिलेश इस जानवर की इन खूबियों से परिचित नहीं होंगे, न ही उन्हें इस बात का इल्म होगा कि जिस कांग्रेस का हाथ पकड़कर वो यूपी के चुनावों में उतरे हैं उसके नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने साल 2013 में इन पर डाक टिकट जारी किया था। 

न ही अखिलेश को इस बात की जानकारी रही होगी कि महानायक अमिताभ बच्चन के जिस ऐड का वो मजाक उड़ा रहे थे साल 2011-12 में यूपीए शासन काल में उसे बेस्ट टूरिज्म फिल्म का पुरस्कार मिला था। यूपीए के शासनकाल में घुडखरों को संरक्षित करने के लिए गुजरात सरकार के प्रयासों को कई बार सराहा गया है। 

और हां, उससे भी खास बात ये है कि अमिताभ बच्चन के विज्ञापनों की सीरीज के बाद गुजरात आने वाले पर्यटकों की संख्या में दोगुना इजाफा दर्ज किया गया है। साल 2011 तक गुजरात में हर साल दो करोड़ के करीब पर्यटक आते थे जिनका आंकड़ा साल 2013 तक आते आते चार करोड़ तक पहुंच गया। ऐसे में जानना जरूरी है कि क्या है इन घुड़खरों में खास जो इन्हें दूसरे जानवरों के मुकाबले दुर्लभ बनाता है। 
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70-80 किमी की रफ्तार से दौड़ता है घुडखर

- फोटो : wild ass
- गुजरात के कच्छ में पाए जाने वाले घुड़खर लगभग सात फुट तक लंबे और करीब साढ़े चार फुट तक ऊंचे होते हैं। 
- इनकी दौड़ने की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर तक प्रति घंटा होती है
- साल 1961 में तो एक समय इनकी संख्या घटकर मात्र 870 रह गई थी, संरक्षण के प्रयासों के बाद कच्छ क्षेत्र में 4800 के करीब घुडखर हैं।
- आज ये घुडखर बेशक गुजरात के कच्छ में ही हैं लेकिन एक दौर में ये पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान से लेकर अफगानिस्तान और इरान तक पाए जाते थे।
- वाइल्ड एस सेंचुरी गुजरात के कच्छ, सुरेन्द्रनगर, बांसकाठा और मेहसाणा जिले के लगभग 5 हजार वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है।
- दूसरे जानवरों के मुकाबले कद काठी से यह काफी मजबूत माना जाता है और चुस्ती फुर्ती में तो घोड़े को भी टक्कर देता है। 
- गधे और घोड़े के बीच के जानवर को खच्चर माना जाता है लेकिन उसी प्रजाति का ये चौथा जानवर है।
- कच्छ के रण में रहने वाला यह जानवर घासफूस खाकर ही अपना गुजारा करता है, खास बात ये है‌ कि कच्छ के रेगिस्तानी इलाकों में इसका अभाव है उसके बावजूद भी इसने खुद को उन्‍हीं हालातों में ढाल लिया है। 
- देखने में ये आम गधे से बिल्कुल अलग और काफी आकर्षक होता है। 
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