एक ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, भाषायी दिक्कतों के कारण चीनी सैनिकों और आईटीबीपी जवानों के बीच कोई ज्यादा संवाद नहीं हो पाता, लेकिन चीनी सैनिक इशारे से बीड़ी की मांग कर देते हैं। बॉर्डर की पोस्टिंग से वापस लौटे आईटीबीपी के जवानों का कहना है कि शांतिकाल में चीनी सैनिक जमकर मिलते हैं। उन्हें हमारे इलाके की बीड़ी जिसे स्थानीय स्तर पर दमदम बीड़ी का नाम दिया गया है, बहुत पसंद है। यूं कहें कि चीनी सैनिक हमारे यहां बनी बीड़ी के दीवाने हैं तो गलत नहीं होगा।
हालांकि उनके पास सिगरेट होती है, लेकिन फिर भी वे बीड़ी पीना चाहते हैं। वे बीड़ी को वहीं पर सुलगा लेते हैं, कश लगाते हैं, हाथ मिलाते हैं और अपने तौर तरीके से हमारा आभार जता कर अपने क्षेत्र में चले जाते हैं। जैसे ही वे अपने क्षेत्र में पहुंचते हैं, एक बड़ा सा बैनर उपर उठा देते हैं। उस पर लिखा होता है...गो बैक फ्रॉम हेयर, साथ ही मुंह से बोलते हैं...मूव मूव।
आईटीबीपी जवानों का कहना है कि इन सबके बीच दोनों देशों के बीच कोई टेंशन नहीं खड़ी होती। कई बार ऐसा लगता है कि यह सब उनकी पेट्रोलिंग का हिस्सा है। हाँ, कई बार हमारे जवान उनकी करंसी देखना चाहते हैं तो वे दिखा देते हैं। यदि किसी जवान को यादगार के तौर पर करंसी लेनी होती है तो वे दे भी देते हैं।