पाकिस्तान में एक बड़े फैसले में पाकिस्तानी राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने अपने देश में हिंदू मैरिज एक्ट को अनुमति दे दी। नए कानून के अमल में आने के बाद पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदुओं को विवाह को लेकर सामाजिक और धार्मिक आजादी तो मिलेगी ही कानूनी रूप से भी इसकी मान्यता बढ़ेगी।
नए कानून को पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हितों को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाकिस्तान में नए 'हिंदू विवाह अधिनियम 2017' का उद्देश्य हिंदू परिवारों के वैध अधिकारों और हितों की सुरक्षा करने के साथ उनके विवाह, परिवार, मां और बच्चों की भी सुरक्षा करना है।
ऐसे में रोचक सवाल ये है कि भारत के हिंदू मैरिज एक्ट और पाकिस्तान के हिंदू मैरिज एक्ट में क्या है अंतर। आइए जानते हैं इस बारे, और बताते हैं आपको दोनों देशों के हिंदू मैरिज एक्ट के बारे में।
भारत मैरिज एक्ट की विशेषताएं
1. हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के अनुसार कोई भी हिंदू स्त्री या पुरुष दूसरे हिंदू स्त्री या पुरुष से शादी कर सकता है, चाहे वह किसी जाति का हो।
2. भारत के हिंदू मैरिट एक्ट में एक विवाह की ही मान्यता है द्विविवाह अमान्य एवं दंडनीय भी है।
3. कुछ परिस्थितियों में न्यायिक पृथक्करण, विवाह-संबंध-विच्छेद तथा विवाह शून्यता की डिक्री की घोषणा की व्यवस्था की गई है।
4. प्रवृत्तिहीन तथा विवर्ज्य विवाह के बाद और डिक्री पास होने के बीच पैदा हुई संतान भी वैध मानी जाएगी।
5. अदालतों को यह अधिकार दिया गया है कि वह हर वैवाहिक झगड़े में समाधान कराने का पूरा प्रयास करें।
6. विवाद की स्थिति में कोर्ट परिस्थितियों का अवलोकन करने के बाद अपने विवेक से तलाक होने पर गुजारा भत्ता की व्यवस्था कर सकता है।
7. न्यायालयों को इस बात का अधिकार भी दिया गया है कि अवयस्क बच्चों की देख रेख एवं भरण पोषण के लिए किसी को जिम्मेदार बना दे।
8. हिंदू मैरिज एक्ट में लड़की की शादी की न्यूनतम आयु 18 साल और युवक की 21 साल तय की गई है।
पाकिस्तान मैरिज एक्ट की विशेषताएं
1. पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू अपनी शादी को पंजीकृत कराकर प्रमाणपत्र भी हासिल कर सकेंगे। यह उनका पहला पर्सनल लॉ है।
2. पाकिस्तान के सिंध में यह पहले से ही लागू था, बाकी तीन राज्यों पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में यह अब लागू होगा।
3. बिल से पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं के धर्मांतरण पर रोक लगेगी।
4. पति की मृत्यु के बाद महिला छह महीने बाद दूसरी शादी कर सकेगी।
5. पहली पत्नी के होते हुए दूसरी शादी करना अब दंडनीय होगा। ऐसा करने पर छह महीने की सजा भी हो सकती है।
6. तलाक के लिए एक साल अलग अलग रहना होगा जरूरी।
7. बिल के अनुसार युवक युवती की शादी की उम्र 18 साल होना जरूरी है।