फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इसरो के वर्ल्ड रिकार्ड अभियान के बारे में जानिए दस खास बातें

Wed, 15 Feb 2017 12:22 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
- फोटो : ANI
विज्ञापन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्‍थान (ISRO) ने आज सुबह श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र से एक साथ 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में छोड़कर वर्ल्ड रिकार्ड कायम किया है। इसरो ने इस उपलब्धि के साथ पूरी दुनिया में अपनी काबिलियत का डंका तो बजाया ही है यह भी साबित किया है कि अंतरिक्ष अनुसंधान की दुनिया में भारत जल्द ही पूरी दुनिया का सिरमौर साबित होने वाला है।
विज्ञापन


इसरो ने उपग्रहों को अंतरिक्ष भेजने में जिस रॉकेट और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है उसे दुनिया में सबसे अग्रणी माना जा रहा है। खास बात है कि 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने का वर्ल्ड रिकार्ड बनाने वाले इसरो से पहले यह रिकार्ड रूस के नाम था जिसने मात्र 37 उपग्रह ही एक साथ अंतरिक्ष में भेजे थे।

ऐसे में भारत की इस दुर्लभ उपलब्धि के बारे में ऐसी काफी बाते हैं जो आपके लिए जानना जरूरी हैं। तो चलिए हम आपको बताते हैं इस प्रक्षेपण से जुड़ी कुछ खास बातें। 
विज्ञापन

अंतरिक्ष में भेजे गए कुल उपग्रह में से 103 विदेशी उपग्रह

shri harikota - फोटो : ANI
1. इसरो के द्वारा जो उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे गए हैं उसमें से मात्र तीन उपग्रह ही भारत के हैं जबकि 101 विदेशी हैं। उनमें भी सबसे ज्यादा 96 अकेले अमेरिका के हैं, बाकी पांच अन्य देशों के। 

2. उपग्रहों को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए इसरो ने पोलर सैटेलाइट लांच व्हिकल का इस्तेमाल किया है। जो 714 किलो के मुख्य सेटेलाइट के अलावा 103 छोटे नैनो सेटेलाइट को अंतरिक्ष की कक्षा में स्‍थापित करेगा। जिनका कुल वजन 664 किलोग्राम है।

3. ज्यादातर नैनो सेटेलाइट विदेशी देशों के हैं जिनमें अमेरिका, कजाकिस्तान, इस्रायल, नीदरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात के हैं। ये सब इसरो के अंततराष्ट्रीय ग्राहक हैं।

4. इसरो ने इस उपलब्धि के साथ ही रूस के उस रिकार्ड को पीछे छोड़ दिया जिसने साल 2014 में अंतरिक्ष में 37 उपग्रहों को भेजकर रिकार्ड कायम किया था। रूस ने इन उपग्रहों को भेजने के लिए इंटर कॉटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग किया था।

5. इससे पूर्व भारत ने बीते जून में 20 उपग्रहों को एक साथ अंतरिक्ष में भेजकर नया रिकार्ड कायम किया था। हालांकि उस दौरान उनमें 13 उपग्रह अमेरिका के थे।
विज्ञापन

अब शुक्र और बृहस्पति ग्रह पर यान भेजने की तैयारी में इसरो

6. इसरो द्वारा अंतरिक्ष में उपग्रहों को स्‍थापित करने वाले अभियानों की खास बात ये है कि ये काफी कम बजट वाले होते हैं जबकि दुनियाभर के अन्य देशों के ऐसे अभियान काफी खर्चे वाले होते हैं। साल 2014 में भारत ने मंगल पर जो यान भेजा था वो अन्य देशों की तुलना में काफी कम बजट वाला था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसकी तुलना हॉलीवुड फिल्म ग्रे‌विटी से करते हुए कहा था कि हमारे मंगल यान का खर्चा उस फिल्म की लागत से भी कम रहा। 

7. इसरो के कम खर्चे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि साल 2013 में उसने मंगल ग्रह की कक्षा में एक उपग्रह स्‍थापित किया था जिसकी कुल लागत 73 मिलियन डॉलर के करीब आई थी। दूसरी ओर नासा द्वारा ऐसे ही मिशन पर भेजे गए एक अन्य यान का कुल खर्चा 671 मिलियन डालर के करीब था। 

8. अंतरिक्ष में अन्य देशों के उपग्रहों को भेजने के इसरो के कदम को व्यवसायिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिससे इसरो को काफी राजस्व प्राप्त हो सकेगा। इसका उपयोग विभिन्न देश फोन, इंटरनेट और अन्य चीजों में कर सकेंगे। 

9. अंतरिक्ष में लगातार बड़ी उपलब्धियों के बाद अब इसरो शुक्र और बृहस्पति ग्रह पर भी अपना यान भेजने का विचार कर रहा है। इसके अलावा मंगल ग्रह पर उसका दूसरा संभावित मिशन भी 2021-22 तक पूरा हो सकता है, जिसमें वह इस लाल ग्रह पर एक रोबोट को भेजने पर विचार कर रहा है। 

10. इसरो की उपलब्धियों से केंद्र सरकार भी काफी प्रभावित है। इसलिए उसने इस बार के केंद्रीय बजट में अंतरिक्ष एजेंसी को दिए जाने वाले बजट में 23 फीसदी तक की वृद्िध कर दी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें