वामपंथ समर्थक किसान संगठन ऑल इंडिया किसान मजदूर सभा (एआईकेएमएस) ने रविवार को कहा कि किसान मोदी सरकार से अपने लिए बेहतर मंडियां चाहते हैं, कृषि कानूनों से मुक्ति नहीं। संगठन ने तीन कृषि कानूनों का विरोध करते हुए कहा कि सरकार का कानूनों को वापस नहीं लेना कपटपूर्ण है।
कहा, खाद आपूर्ति, बिजली, सिंचाई आदि सुविधाएं कमजोर होंगी
एआईकेएमएस की केंद्रीय समिति ने 24 पन्नों के दस्तावेज में कहा कि किसानों ने एपीएमसी कानून के तहत मंडियों की कार्यशैली में सुधार करने की मांग की थी, उनसे मुक्ति की मांग नहीं। इसमें कहा गया है कि सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य निजी निवेश बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों तक विकास और बुनियादी ढांचे की पहुंच बनाना है।
वहीं, किसान सभा का कहना है कि इससे खाद आपूर्ति, बिजली, सिंचाई आदि सुविधाएं कमजोर हो जाएंगी, क्योंकि नए कानून के तहत सरकार निजी कंपनियों को ही प्रोत्साहन देगी।
किसानों की आय बढ़ाने और इनपुट लागत कम करने के सरकार के दावे पर संगठन का कहना है कि मौजूदा सरकार ने डीजल के दाम में बेतहाशा वृद्धि की है। जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 40-50 डॉलर प्रति बैरल रह गई है।
उसका कहना है कि आज डीजल और पेट्रोल पर कुल कर करीब 50 रुपये है, जो कि कीमत का 65 फीसदी है। इतना ही नहीं निजी कंपनियों द्वारा कीटनाशक और कृषि उपकरण महंगे दाम पर बेचे जा रहे हैं। हर साल कीमतें बढ़ जाती हैं और किसानों को इनके इनके भुगतान के लिए लोन लेना पड़ता है।