राजधानी की सीमाओं पर जमा आंदोलनकारी किसानों की संख्या बेशक कम हो रही हो, लेकिन कई किलोमीटर तक लगे टेंट और पंडाल अभी बदस्तूर नजर आ रहे हैं। आंदोलन के लंबा खिंचने और रास्ते बंद होने की वजह से कई तरह की मुश्किलें लगातार जारी हैं। खाली पड़े पंडालों और टेंट को देखकर बेशक किसान संगठनों को भी नई रणनीति बनाने की जरूरत महसूस हो रही है। आंदोलन में फिर से जान फूंकने के लिए किसानों ने जो नई रणनीति बनाई है उसी के तहत 26 मार्च को भारत बंद की अपील की गई है। किसान नेता अब भी दावा कर रहे हैं कि जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं लिए जाते उनका आंदोलन भीड़ की संख्या के उतार चढ़ाव के बावजूद जारी रहेगा।
26 जनवरी की हिंसा के बाद से माहौल लगातार बदला हुआ नजर आ रहा है। पहले जिस उत्साह के साथ युवा, बुजुर्ग और हर वर्ग के किसान आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे थे, उनकी संख्या में लगातार कमी होती नजर आ रही है। किसानों का अपने घर लौटने का सिलसिला अभी तक जारी है। हालांकि किसान संगठनों ने किसान को रोकने और आंदोलन को फिर से धार देने के लिए देशव्यापी आंदोलन भी शुरू किए हैं। लेकिन, इसका भी अभी तक कोई खास असर देखने को नहीं मिला है। किसान नेता हन्नान मौला ने अमर उजाला से कहा कि आंदोलन को जारी रखने और किसानों को उससे जोड़े रखने के लिए ही हर 15 दिनों में कोई न कोई कार्यक्रम किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में 28 मार्च को होलिका दहन वाले दिन पूरे भारत के अंदर तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई जाएंगी। आंदोलन लंबा चलने के सवाल के जवाब पर मौला ने कहा कि कोई भी आंदोलन एक जैसा नहीं चलता है,उसमें उतार चढ़ाव आते रहते हैं। जहां तक किसानों का सवाल है तो किसी न किसी काम की वजह से कुछ किसान लौट गए थे लेकिन हम उन्हें दोबारा लाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकांश किसान लौट भी चुके हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा ने आने वाले कुछ दिनों के कार्यक्रम तय कर लिए हैं। 15 मार्च को किसान संगठन डीजल, पेट्रोल, गैस सिलिंडर की कीमत में वृद्धि और रेलवे के निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। 17 मार्च को किसान संगठन और आल इंडिया ट्रेड यूनियन सिंघु बॉर्डर पर मीटिंग में हिस्सा लेंगे और भारत बंद पर फैसला करेंगे। 26 मार्च को किसान आंदोलन के चार महीना पूरा होने पर भारत बंद का आह्वान किया जा रहा है।
किसान महापंचायत से भाजपा के खिलाफ लामबंदी
देश में चारों ओर किसान आंदोलन को मजबूती से फैलाने के लिए किसान महापंचायतों को कारगर हथियार बनाया जा रहा है। पहले चरण में किसान संगठन पश्चिम बंगाल के अलावा मध्यप्रदेश, राजस्थान और दक्षिण भारत के राज्यों में महापंचायत आयोजित की जाएगी। यूपी, हरियाणा और पंजाब में किसानों की महापंचायत का दौर जारी है। मार्च के अंत में केरल में भी महापंचायत आयोजित की जाएगी। इन महापंचायतों में किसान संगठन लोगों को सरकार की किसान विरोधी नीतियों के बारे में बताएंगे और लोगों से सरकार के झांसे से दूर रहने की अपील करेंगे।