लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर दिए गए बयान को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं को धमकाने और लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया।
रिजिजू ने कहा, यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं को धमकी दे रहे हैं। यह लोकतंत्र को कमजोर करने की एक बहुत बड़ी साजिश है। उनका यह रवैया और सोच बेहद खतरनाक है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, विपक्ष एक सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण योजना के तहत संवैधानिक संस्थाओं की छवि को खराब करने में जुटा है। यह सीधे-सीधे लोकतंत्र पर हमला है।
रिजिजू ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी की शैली से विपक्ष के भीतर भी असहमति बढ़ रही है। उन्होंने कहा, अब तो विपक्षी दलों के नेता भी आंतरिक रूप से राहुल गांधी का विरोध करने लगे हैं। लोग यह कहने लगे हैं कि राहुल गांधी एक गंदी राजनीति खेल रहे हैं और देश की छवि को नष्ट करना चाहते हैं।
‘झूठा आरोप लगा रहे हैं, संसद नहीं चलने दे रहे’
किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा, विपक्षी सांसद जैसे ही बहस शुरू होती है। वेल में आ जाते हैं और संसद की कार्यवाही नहीं चलने देते। फिर ये कहते हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा। मैं इस झूठे आरोप की निंदा करता हूं कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा।
राहुल गांधी पर सीधा हमला करते हुए उन्होंने कहा, राहुल गांधी बार-बार भारत विरोधी बयान दे रहे हैं, जो कि बिल्कुल गलत है। कई विपक्षी दलों के नेताओं ने भी उनके बयानों की आलोचना की है। कोई भी भारत की अर्थव्यवस्था और छवि को लेकर अपमानजनक बातें नहीं कह सकता। राहुल गांधी कोई बच्चे नहीं हैं। उन्हें समझना चाहिए कि विपक्ष के नेता होने के नाते राष्ट्रविरोधी बयान देना और संसद को बाधित करना उचित नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि संसद नहीं चलने से विपक्ष का ही सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है क्योंकि उनकी बातें सदन में नहीं उठ पा रही हैं। जो मुद्दे नियमों के तहत उठाए जा सकते हैं, विपक्ष उन पर चर्चा नहीं करता है।
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किरेन रिजिजू बोले- सदस्यों की मांग पर CISF की तैनाती हुई
संसद में सीआईएसएफ की तैनाती और बढ़ी हुई सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सांसदों की सुरक्षा संबंधी मांगों के आधार पर लिया गया है।
रिजिजू ने कहा, संसद में सुरक्षा बढ़ाने की मांग खुद सांसदों ने की थी, इसलिए सीआईएसएफ को तैनात किया गया है। संसद के भीतर कई बार कुछ सदस्य ट्रेजरी बेंच की मेज पर चढ़ जाते हैं या वेल में आकर आक्रामक व्यवहार करते हैं। ऐसे कृत्यों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि, किसी भी सांसद को बोलने से नहीं रोका जाएगा। जब तक कोई सांसद दुर्भावनापूर्ण गतिविधि में शामिल नहीं होता, तब तक मार्शल या सुरक्षा बल कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। लेकिन जब कुछ सांसद आक्रामक हो जाते हैं, तो उन्हें रोकने के लिए इंतजाम किए जाते हैं।
'संवैधानिक प्रक्रिया पर चर्चा संभव नहीं'
संसद में एसआईआर पर बहस की विपक्ष की मांग को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार नियमों के तहत किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन एसआईआर जैसे मामलों पर बहस नहीं हो सकती क्योंकि यह एक संवैधानिक संस्था द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया है।
रिजिजू ने कहा, मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार नियमों के तहत किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। लेकिन एसआईआर पर चर्चा नहीं हो सकती, क्योंकि यह एक संवैधानिक निकाय द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को बाधित करने के बहाने ढूंढ़ रहा है, जबकि सरकार लोकतांत्रिक ढंग से सभी विषयों पर चर्चा के लिए प्रतिबद्ध है।