विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में हाईकोर्ट सुप्रीमकोर्ट में महिला और एससी एसटी न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े प्रश्नों और पूरक प्रश्नों का उत्तर दिया। केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा यह पहला अवसर है है कि जब सुप्रीम कोर्ट में चार महिला न्यायाधीश कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा स्वीकृत पदों की संख्या 34 है। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान प्रश्न और पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा इनमें से तीन महिला न्यायधीशों की नियुक्ति उनके कार्यकाल में हुई है। सदन को जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के लिए कुल स्वीकृत पदों की संख्या 1098 है। जिन पर 83 महिला न्यायाधीश कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा केंद्र की मोदी सरकार महिला न्यायाधीशों की संख्या में बढ़ोत्तरी के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति देश के संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 224 के तहत की जाती है।
उन्होंने कहा कि इन पदों के लिए आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। कानून मंत्री ने सदन को जानकारी दी की सरकार मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध करती रहती है कि उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए प्रस्ताव करते समय समाज के हर वर्ग के प्रतिनिधित्व का ख्याल रखें ताकि इससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ महिलाओं के नाम पर भी विचार किया जा सकें।
केंद्रीय मंत्री ने कहा सामाजिक विविधता को बनाए रखने के लिए उन्होंने स्वयं सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कॉलेजियम से अपने स्तर से भी अनुरोध किया है कि वह नामों की सिफारिश करते समय एससी,एसटी अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के नामों पर भी विचार करें।
रिजिजू ने कहा उनकी सरकार जानबूझकर किसी नियुक्ति में प्रक्त्रिस्या में समय नहीं लगाती है। किंतु इसके लिए तय प्रक्त्रिस्या है, जिसका पालन करने के साथ यह भी सुनिश्चित करना होता है कि न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति पाने वाला इस उम्मीदवारी के अनुरूप हो।